जगतार सिंह हवारा मामले में सरकारों पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप, 21 फरवरी को गांव हवारा में बड़े संघर्ष का ऐलान

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चंडीगढ़, 17 फरवरी 2026: सरकारों द्वारा कथित मानवाधिकार उल्लंघन के मुद्दे पर सिख संगठनों और सामाजिक नेताओं में गहरी चिंता देखी जा रही है। बंदी सिखों की रिहाई के प्रश्न को लेकर एक बार फिर आवाज बुलंद की गई है। विशेष रूप से जगतार सिंह हवारा के मामले को केंद्र में रखते हुए सरकार से कई सवाल पूछे गए हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 में चब्बा में आयोजित एक बड़े समागम में संगत द्वारा उन्हें श्री अकाल तख्त साहिब का जत्थेदार घोषित किया गया था।

एडवोकेट गुरशरण सिंह ने बताया कि जगतार सिंह हवारा की वृद्ध माता जीवन के अंतिम चरण में गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं। आरोप लगाया गया कि इस संवेदनशील स्थिति के बावजूद सरकार मां और पुत्र की मुलाकात की अनुमति नहीं दे रही, जिसे मानवाधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन बताया गया। नेताओं ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को पारिवारिक मिलन और मानवीय गरिमा का अधिकार है और इसकी रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। इस मुद्दे पर 21 फरवरी को गांव हवारा में एक बड़े एकत्रीकरण की घोषणा की गई है, जहां आगामी संघर्ष की रणनीति तय की जाएगी। नेताओं ने कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा के लिए सरकार के खिलाफ व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा और लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की गई है।

इस अवसर पर वक्ता पाल सिंह फ्रांस ने कहा कि यदि सरकारें मानवाधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करतीं, तो संघर्ष को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे समाज के अधिकारों की है।
इस मौके पर गुरदीप सिंह बठिंडा, अमरप्रीत सिंह पंजकोहा, जसवंत सिंह सिद्धूपुर, अवतार सिंह जी मुल्लांपुर, एडवोकेट गुरशरण सिंह, अमरीक सिंह रोमी मौजूद थे।

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