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बीमा क्षेत्र का निजीकरण नहीं बल्कि सरकार के ओनरशिप वाली मेगा बीमा कंपनी का गठन किया जाए : जीआईईएआईए
बीमा क्षेत्र में 100% एफडीआई वापस ले सरकार: यूनियन की मांग
चंडीगढ़, जनरल इंश्योरेंस एम्प्लॉइज’ ऑल इंडिया एसोसिएशन (जीआईईएआईए) द्वारा बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में पब्लिक सेक्टर की जनरल बीमा कंपनियों के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए यूनियन के राष्ट्रीय सचिव त्रिलोक सिंह ने स्पष्ट कहा कि बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत फोरन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (एफडीआई) की अनुमति और निजीकरण की नीतियां जनहित के खिलाफ हैं। उनके अनुसारबीमा कोई साधारण व्यावसायिक गतिविधि नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी अत्यंत महत्वपूर्ण सेवा है। विदेशी कंपनियाँ देश की सेवा के लिए नहीं आती, बल्कि लाभ कमाकर उसे विदेश ले जाने के उद्देश्य से आती हैं, जिससे देश की आर्थिक संप्रभुता कमजोर होती है।
उन्होंने कहा कि सरकार को निजीकरण के बजाय नेशनल इंश्योरेंस, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस, ओरिएंटल इंश्योरेंस और न्यू इंडिया एश्योरेंस, इन चारों सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का विलय कर एक सशक्त, सरकार के स्वामित्व (ओनरशिप) वाली “मेगा बीमा कंपनी” का गठन करना चाहिए। इससे कार्यकुशलता बढ़ेगी, वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित होगी, रोजगार की रक्षा होगी और देश की सामाजिक बीमा आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा किया जा सकेगा।
त्रिलोक सिंह ने बताया कि कर्मचारियों, अधिकारियों और पेंशनरों के 45 माह के संघर्ष के परिणामस्वरूप वेतन पुनरीक्षण (पे रिवीजन), एनपीएस में 14 प्रतिशत अंशदान (कॉन्ट्रीब्यूशन) तथा परिवार पेंशन में 30 प्रतिशत की वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण निर्णय संभव हुए। उन्होंने श्रम कानूनों में किए जा रहे बदलावों और बीमा क्षेत्र में एफडीआई बढ़ाने के प्रयासों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे पब्लिक सेक्टर का स्ट्रक्चर कमजोर होगा और मुनाफा विदेशी कंपनियों के हाथों में चला जाएगा।
यूनियन ने मांग की कि लेबर कोड्स के विपरीत प्रावधानों को रद्द किया जाए , बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई का निर्णय वापस लिया जाएतथा पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स के निजीकरण की प्रक्रिया रोकी जाए। साथ ही सभी काडर्स में पर्याप्त भर्ती, 1995 पेंशन योजना का विस्तार, स्टाफ ग्रुप मेडिक्लेम पॉलिसी में सुधार, लंबित गैर-कोर लाभों का निपटारा और ग्रुप मेडिकल इंश्योरेंस पर जीएसटी हटाने की मांग दोहराई गई।
प्रेस वार्ता में यह भी बताया गया कि हाल ही में आयोजित क्षेत्रीय सम्मेलन में सात प्रस्ताव पारित किए गए, जिनमें चारों कंपनियों के विलय, कॉन्ट्रैक्ट इंप्लाइज का रेगुलाईजेशन, डायरेक्ट रिक्यूटमेंटऔर महंगाई के अनुरूप वेतन वृद्धि की मांग प्रमुख हैं।
यूनियन ने देशभर के कर्मचारियों से सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष को तेज करने का आह्वान किया।