#bnnindianews इबोला वायरस के सामुदायिक प्रसार के खिलाफ शीघ्र पहचान एक मजबूत बचाव है: डॉ. राजेश गेरा
चंडीगढ़: वैश्विक स्तर पर इबोला वायरस के प्रकोप से जुड़ी 120 से अधिक मौतों के साथ, एक और संक्रामक बीमारी के आपातकाल के खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
डायरेक्टर एवं एचओडी- इंटरनल मेडिसिन , पार्क अस्पताल, पंचकुला, डॉ. राजेश गेरा ने कहा कि अपनी विशाल जनसंख्या घनत्व और भारी अंतरराष्ट्रीय यात्रा के कारण हमें अत्यधिक सतर्क और तैयार रहना चाहिए।
उन्होंने कहा, “हालांकि कोविड-19 महामारी के बाद हमारी स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना में काफी सुधार हुआ है, लेकिन इबोला अपनी उच्च मृत्यु दर और लक्षण दिखने के बाद तेजी से बढ़ने के कारण एक अलग चुनौती पेश करता है। सभी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर, विशेष रूप से प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों के लिए थर्मल स्क्रीनिंग और कड़ी निगरानी को तुरंत मजबूत किया जाना चाहिए।”
डॉ. गेरा ने बताया कि सामुदायिक प्रसार के खिलाफ शीघ्र पहचान ही सबसे मजबूत बचाव है।
“बुखार, अत्यधिक कमजोरी, शरीर में दर्द, उल्टी, दस्त, अस्पष्ट रक्तस्राव और अचानक बिगड़ती स्थिति कुछ ऐसे प्रारंभिक चेतावनी संकेत हैं जिन्हें स्वास्थ्य पेशेवरों और आम जनता दोनों को तुरंत पहचानना चाहिए।”
आज भारत में आइसोलेशन सुविधाएं, प्रयोगशाला सहायता, संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी बेहतर ढंग से उपलब्ध हैं। हालांकि, डॉ. गेरा ने बताया कि तैयारी केवल टर्शियरी अस्पतालों तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि सामुदायिक स्तर पर जागरूकता, रैपिड रिस्पांस सिस्टम, आपातकालीन क्वारंटाइन मैकेनिज्म और कोऑर्डिनेट पब्लिक हेल्थ कम्युनिकेशन भी उतने ही आवश्यक हैं। इस समय सतर्कता बरतने की जरूरत है, लेकिन घबराहट नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि समय पर स्क्रीनिंग, शीघ्र निदान, सख्त संक्रमण नियंत्रण और जन सहयोग से संक्रमण के प्रसार के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
डॉ. गेरा ने आगे कहा कि स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा निरंतर निगरानी और सक्रिय निवारक उपाय यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण होंगे कि भारत किसी भी उभरती वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहे।