#bnnindianews चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने देश की राष्ट्रपति से मुलाकात कर आम आदमी पार्टी छोड़ने वाले सात राज्यसभा सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग उठाई। इस दौरान पंजाब AAP के सभी विधायक भी उनके साथ मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने विधायकों के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन राष्ट्रपति को सौंपते हुए कहा कि यह मामला लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनादेश से जुड़ा हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में भाजपा के केवल दो विधायक होने के बावजूद राज्यसभा में उसके सदस्यों की संख्या बढ़ना लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने सातों सांसदों को “इलेक्टेड नहीं बल्कि सेलेक्टेड” बताते हुए उनके दल-बदल को पंजाब और जनता के साथ विश्वासघात करार दिया।
मान ने सांसदों को इस्तीफा देकर दोबारा जनता के बीच जाने की चुनौती देते हुए कहा कि केंद्रीय एजेंसियों और राजनीतिक दबाव के जरिए लोकतंत्र को कमजोर नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी दलों को तोड़ने और नेताओं को दबाव में लाने के लिए किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट X पर भी बैठक की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि “आज दिल्ली में माननीय राष्ट्रपति के सामने हमने देश में हो रहे लोकतंत्र के कत्ल के खिलाफ अपनी आवाज मजबूती से उठाई। राजनीतिक दलों को असंवैधानिक तरीके से तोड़ना लोकतांत्रिक ढांचे पर सीधा हमला है।”
उन्होंने भाजपा पर “ऑपरेशन लोटस” चलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पंजाब में ऐसी कोशिशें कभी सफल नहीं होंगी। मान ने कहा कि पंजाब के विधायक लाखों लोगों की आवाज हैं और राज्य की जनता विश्वासघात को कभी स्वीकार नहीं करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यसभा के सात सदस्यों का दल-बदल संविधान और लोकतंत्र दोनों का अपमान है। उनके मुताबिक, अगर कोई राजनीतिक फैसला लेना था तो पूरी पार्टी को प्रस्ताव पारित करना चाहिए था, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर निष्ठा बदलना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।