क्राफेड के प्रतिनिधिमंडल ने यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक से की मुलाकात

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चंडीगढ़, [11 March ]: चंडीगढ़ रेजिडेंट्स एसोसिएशंस वेलफेयर फेडरेशन (CRAWFED) के प्रतिनिधिमंडल ने, जिसके नेतृत्व में इसके चेयरमैन हितेश पुरी और जनरल सेक्रेटरी रजत मल्होत्रा थे, यूटी चंडीगढ़ के माननीय प्रशासक से मुलाकात कर चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (CHB) के ड्वेलिंग यूनिट्स में नीड-बेस्ड चेंजेज रेगुलराइजेशन पॉलिसी से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।

इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा प्रस्तावित नीड-बेस्ड चेंजेज रेगुलराइजेशन पॉलिसी लाने के लिए प्रशासक का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस पहल से शहर के विभिन्न सेक्टरों में स्थित हाउसिंग बोर्ड के फ्लैटों में रहने वाले हजारों परिवारों में आशा की किरण जगी है।

हालांकि, क्राफ़ेड के प्रतिनिधियों ने इस नीति से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर भी प्रशासक का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 की नीति, जिसे अब प्रस्तावित 2026 की नीति में फिर से शामिल किया जा रहा है, उसमें वर्ष 2010 के बाद चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड द्वारा समय-समय पर जारी किए गए कई कार्यालय आदेशों और नोटिफिकेशनों को शामिल नहीं किया गया है। इन आदेशों के तहत निवासियों को अपने ड्वेलिंग यूनिट्स में जरूरत के अनुसार कुछ बदलाव करने की अनुमति दी गई थी।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि चंडीगढ़ के विभिन्न सेक्टरों में सीएचबी फ्लैटों में रहने वाले लगभग 60,000 परिवारों ने इन आदेशों और नोटिफिकेशनों के आधार पर अपने प्लॉट एरिया और स्टोरी लाइन के भीतर जरूरत के अनुसार बदलाव किए हैं। लेकिन प्रस्तावित नीति में यह उल्लेख किया गया है कि यह पूर्व में जारी सभी कार्यालय आदेशों और नोटिफिकेशनों को निरस्त (Supersede) करती है, जिससे ऐसे अनेक निवासी, जिन्होंने बोर्ड की अनुमति के आधार पर बदलाव किए थे, तकनीकी रूप से उल्लंघनकर्ता बन सकते हैं।

इस स्थिति से हजारों परिवारों में चिंता और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी अवगत कराया कि चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड द्वारा ऐसे मामलों में ड्वेलिंग यूनिट्स को रद्द (Cancellation/Resumption) करने के लिए शो-कॉज नोटिस जारी करने तथा भारी-भरकम डेमोलिशन या पेनल्टी चार्ज लगाने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।

इस संदर्भ में क्राफ़ेड ने प्रशासक से अनुरोध किया कि 2010 के बाद सीएचबी द्वारा जारी सभी आदेशों और नोटिफिकेशनों को प्रस्तावित रेगुलराइजेशन नीति में शामिल किया जाए, ताकि शहर में रहने वाले लाखों निवासियों को राहत मिल सके और उन परिवारों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े जिन्होंने बोर्ड की पूर्व अनुमति के आधार पर ये बदलाव किए थे।

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी सुझाव दिया कि वन-टाइम सेटलमेंट स्कीम लाई जाए, जिसके तहत प्लॉट एरिया और स्टोरी लाइन के भीतर किए गए ऐसे निर्माण, जो नई नीति में शामिल नहीं हैं, उन्हें नाममात्र शुल्क लेकर नियमित (Regularize) किया जा सके।

इसके अतिरिक्त, सीआरएडब्ल्यूएफईडी ने अनुरोध किया कि सीएचबी के स्वतंत्र मकानों (Independent Houses) में भी ऊपरी मंजिलों पर निर्माण की अनुमति दी जाए, जैसा कि चंडीगढ़ में समान श्रेणी के मारला मकानों में पहले से ही अनुमत है, ताकि समान प्रकार की आवासीय संपत्तियों के बीच समानता बनी रहे।

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी मांग रखी कि:
* मृतक अलॉटियों के कानूनी वारिसों को वसीयत (Will) के आधार पर ड्वेलिंग यूनिट का ट्रांसफर बिना किसी कथित उल्लंघन से जोड़कर किया जाए, ताकि परिवारों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
* सीएचबी संपत्तियों की बिक्री और ट्रांसफर को छोटे-मोटे निर्माण उल्लंघनों से अलग करते हुए पहले की तरह सरल और सुगम बनाया जाए, ताकि संपत्ति लेन-देन में अनावश्यक बाधाएं न आएं।

माननीय प्रशासक ने प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों को ध्यानपूर्वक सुना और आश्वासन दिया कि सीआरएडब्ल्यूएफईडी द्वारा उठाई गई चिंताओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा।

क्राफ़ेड ने आशा व्यक्त की कि जल्द ही एक न्यायसंगत, व्यापक और समावेशी नीति लागू की जाएगी, जिससे शहर में सीएचबी फ्लैटों में रहने वाले हजारों परिवारों को लंबे समय से प्रतीक्षित राहत मिल सकेगी।

जारीकर्ता:
चंडीगढ़ रेजिडेंट्स एसोसिएशंस वेलफेयर फेडरेशन (CRAWFED)

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