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चंडीगढ़। नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर, चंडीगढ़ से अपने करियर की शुरुआत करने वाली और आज वैश्विक स्तर पर पहचान बना चुकी आईटी कंपनी टवेन्टी सेकंड सेंचुरी टेक्नोलोजिस के अनिल शर्मा ने अमेरिका की सरकारी एजेंसियों को सेवाएं देने वाली कंपनी ब्रिटिश टेलीकॉम फेडरल (जो ब्रिटिश टेलीकॉम ग्रुप की यूएस. गवर्नमेंट कॉन्ट्रैक्टिंग इकाई है) का अधिग्रहण कर लिया है। इस रणनीतिक कदम के बाद ब्रिटिश टेलीकॉम फेडरल अब टवेन्टी सेकंड सेंचुरी नेटवर्क के नाम से काम करेगी और अमेरिकी संघीय मिशनों को विश्वसनीय कनेक्टिविटी और सुरक्षित नेटवर्क सेवाएं प्रदान करेगी।
चंडीगढ़–मोहाली क्षेत्र के लिए यह खबर खास महत्व रखती है। कंपनी के सीईओ अनिल शर्मा, जो थापर इंस्टीट्यूट के पूर्व छात्र हैं, इस क्षेत्र की मिट्टी से जुड़े प्रेरणादायक व्यक्तित्व हैं।
यह अधिग्रहण ब्रिटिश टेलीकॉम फेडरल के दूरसंचार और नेटवर्किंग अनुभव को टवेन्टी सेकंड सेंचुरी टेक्नोलोजिस की आईटी अपग्रेडेशन, साइबर सुरक्षा और मिशन सपोर्ट विशेषज्ञता के साथ जोड़ता है। ‘‘टवेन्टी सेकंड सेंचुरी नेटवर्क ’ के रूप में यह नई इकाई अमेरिकी संघीय एजेंसियों को सुरक्षित, भरोसेमंद और आधुनिक नेटवर्क समाधान उपलब्ध कराएगी, जिन पर वे अपने दैनिक संचालन के लिए निर्भर रह सकें।
साधारण परिवार में जन्मे और छह भाई-बहनों के बीच पले-बढ़े अनिल शर्मा का बचपन साझा जिम्मेदारियों के बीच बीता। सीमित संसाधनों से निकलकर एक ऐतिहासिक अमेरिकी अधिग्रहण का नेतृत्व करना उनकी मेहनत, शिक्षा और वैश्विक सोच का परिणाम है। उनकी यह यात्रा क्षेत्र के उन हजारों परिवारों के सपनों को साकार करती है, जो मानते हैं कि शिक्षा और परिश्रम से विश्व स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।
अनिल शर्मा ने अपने करियर की शुरुआत सार्वजनिक सेवा से की। वर्ष 1989 से 1997 तक उन्होंने नेशनल इनफॉरमेटिक्स सेंटर एनआईसी, भारत सरकार में जिला सूचना विज्ञान अधिकारी और सिस्टम विश्लेषक के रूप में कार्य किया। चंडीगढ़ के पहले जिला सूचना विज्ञान अधिकारी के रूप में उन्होंने एनआईसी जिला कार्यालय की स्थापना की और सरकारी विभागों में आईटी सिस्टम लागू करने में अग्रणी भूमिका निभाई। पंजाब और चंडीगढ़ के विभिन्न विभागों को दी गई उनकी परामर्श सेवाओं ने क्षेत्र में ई-गवर्नेंस की नींव मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
अपने व्यापक विजन पर बोलते हुए अनिल शर्मा ने कहा कि टवेन्टी सेकंड सेंचुरी टेक्नोलोजिस की यह सफलता केवल एक कॉर्पोरेट उपलब्धि नहीं, बल्कि चंडीगढ़–मोहाली के आईटी इकोसिस्टम को प्रेरित और सशक्त बनाने का अवसर भी है। उनका मानना है कि क्षेत्र से उभरती वैश्विक प्रतिस्पर्धी कंपनियां निवेश आकर्षित करेंगी, उच्च मूल्य के रोजगार सृजित करेंगी और चंडीगढ़–मोहाली को अंतरराष्ट्रीय तकनीकी मानचित्र पर एक मजबूत पहचान दिलाएंगी।