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चंडीगढ़: पीएचडी चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की तरफ से चंडीगढ़ में आईबीसी पल्स कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया, जिसमें इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी), 2016 के तहत उभरते ट्रेंड्स, चुनौतियों और सुधारों पर ज़ोर दिया गया।
इस अवसर पर अपने मुख्य भाषण में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के संस्थापक अध्यक्ष, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व जज एवं जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस (रिटायर्ड) एम.एम. कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार ने उद्योगों के लंबे समय से लंबित मुद्दों को हल करने के लिए एनसीएलटी की स्थापना की है। जिसने जटिल औद्योगिक और कॉर्पोरेट मामलों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
एनसीएलटी के पूर्व ज्यूडिशियल मेंबर हरनाम सिंह ठाकुर ने पेंडिंग मामलों और इंडस्ट्रियल झगड़ों को कम करने के लिए बेंच और मेंबर की संख्या बढ़ाने और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने की मांग का समर्थन किया। सीनियर एडवोकेट और एनसीएलटी बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट, डॉ.यू.के चौधरी ने बताया कि न्यायिक प्रक्रियाएं हमेशा सख्ती से टाइम-बाउंड नहीं हो सकतीं,क्योंकि न्याय पक्का करने के लिए अदालतों को सभी पहलुओं पर सुनवाई करनी चाहिए।
इस अवसर पर एनसीएलटी के पूर्व ज्यूडिशियल मेंबर राजशेखर वी.के., डॉ. पी.एस.एन. प्रसाद,एल.एन. गुप्ता ने अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर विभिन्न ज्वलंत विषयों पर पैनल डिस्कशन का भी आयोजन किया गया, जिसमें कई विशेषज्ञों ने अपने विचार व्यक्त किए।