चंडीगढ़ प्रेस क्लब में घुटनों की बीमारी पर बड़ा खुलासा

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चंडीगढ़ प्रेस क्लब में घुटनों की बीमारी पर बड़ा खुलासा

बिना ऑपरेशन इलाज से नी रिप्लेसमेंट से बच सकते हैं मरीज़ – 360डिग्री सिस्टेमिक इलाज से,घुटने के साथ ही शरीर की इंफ़्लामेशन का भी इलाज करना ज़रूरी होता है

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की 56,548 लोगों पर आधारित स्टडी में खुलासा—
16 प्रतिशत लोग मस्कुलोस्केलेटल दर्द से पीड़ित, भारत में हर छठा व्यक्ति प्रभावित
फ़्रांस की स्टडी के अनुसार बिना घुटना बदले,सिस्टमिक इलाज के रिज़ल्ट बेहतर
चंडीगढ़:
चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान लिवरपूल यू के से एम सी एच;लुधियाना के प्रसिद्ध ऑर्थोपेडिक सर्जन एवं रीजेनेरेटिव मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. एन. के. अग्रवाल ने घुटनों की बढ़ती समस्याओं और उनके बिना ऑपरेशन इलाज पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। डॉ. अग्रवाल पिछले 35 वर्षों से नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के क्षेत्र में कार्यरत हैं।

उन्होंने बताया कि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की 56,548 लोगों पर आधारित एक व्यापक स्टडी के अनुसार, 16 प्रतिशत लोग मस्कुलोस्केलेटल दर्दों से पीड़ित पाए गए हैं। भारत के संदर्भ में इसका अर्थ है कि हर छठा व्यक्ति इस समस्या से जूझ रहा है।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि वर्ष 2036 तक भारत में हर सात में से एक व्यक्ति 60 वर्ष या उससे अधिक आयु का होगा, जिनमें से 16 से 20 प्रतिशत लोगों को घुटनों की बीमारी होने की आशंका है। ऐसे में यह समस्या आने वाले वर्षों में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन सकती है।

उन्होंने घुटनों की बीमारी के प्रमुख कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बदलती जीवनशैली, बढ़ती उम्र, मोटापा और भागदौड़ भरी दिनचर्या इस समस्या को तेजी से बढ़ा रही हैं। ऐसे में बीमारी की समय रहते पहचान और सही उपचार बेहद जरूरी है।

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि यद्यपि नी रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद जटिल समस्या के मरीज लगभग 5 प्रतिशत होते हैं, लेकिन 20–25 प्रतिशत मरीजों में अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाते। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए उन्होंने रीजेनरेटिव मेडिसिन आधारित एक नया उपचार प्रोटोकॉल विकसित किया है, जो घुटनों की बीमारी के मूल कारणों पर काम करता है और बिना ऑपरेशन इलाज का विकल्प प्रदान करता है।

उन्होंने कहा,
“हम अब तक इस नए प्रोटोकॉल से 150 से अधिक घुटनों का सफल इलाज कर चुके हैं। 95 प्रतिशत से अधिक मरीजों में परिणाम अत्यंत संतोषजनक रहे हैं। इलाज के बाद दर्द में स्पष्ट कमी आई है, चलने-फिरने में सुविधा हुई है और मरीजों की दैनिक जीवनशैली में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।”

डॉ. अग्रवाल के अनुसार, कई ऐसे मरीज जिन्हें पहले नी रिप्लेसमेंट सर्जरी की सलाह दी गई थी, वे अब बिना सर्जरी सामान्य जीवन जी पा रहे हैं। उन्होंने घुटनों के दर्द को नजरअंदाज न करने की सलाह देते हुए कहा कि—

“समय पर इलाज से सूजन को नियंत्रित किया जा सकता है और घुटनों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। सही समय पर सही उपचार ही सर्जरी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।”

प्रेस वार्ता के दौरान उपस्थित पत्रकारों ने इस नई चिकित्सा पद्धति में गहरी रुचि दिखाई और इसे भविष्य में वरिष्ठ नागरिकों एवं घुटनों के मरीजों के लिए बड़ी राहत बताया।

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