क्रिसमस पर्व: घर-घर जाकर गाए कैरल गीत

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चंडीगढ़:–ट्राईसिटी चर्चिज एसोसिएशन द्वारा ईसाईयों के सबसे बड़े पर्व क्रिसमस के शुभागमन के अवसर पर कैरोल सिंगिंग का कार्यक्रम शुरू किया हुआ है। युवा, बच्चे और बुजुर्ग उत्साह के साथ टोलियां बनाकर मसीही परिवारों के घरों में पहुंचे और प्रभु यीशु मसीह के जन्म के गीत गाकर खुशियां मनाई। झूमो नाचो खुशी से आज येशु पैदा हुआ…. और आया मसीह चरनी में…. जैसे गीतों की गूंज गिटार व ढोल की धुनों पर देर रात तक सुनाई दी।
इस अवसर पर ट्राईसिटी चर्चिज एसोसिएशन के प्रेसिडेंट लॉरेन्स मलिक ने बताया कि प्रभु यीशु मसीह ने मानवता के उद्धार के लिए अपने प्राण त्यागे। कैरोल गायन इस उत्सव का अभिन्न हिस्सा है। कैरोल टीम में कई सदस्य शामिल थे।
उन्होंने आगे कहा कि ईसाई समुदाय ने क्रिसमस के आगमन की खुशी और यीशु मसीह के जन्म का सुसमाचार फैलाने के लिए घर-घर जाकर कैरोल सिंगिंग (भजन गायन) शुरू कर दिया है, यह एक पुरानी परंपरा है जो मध्य युग से चली आ रही है, जिसमें लोग घर-घर जाकर आनंद के गीत गाते हैं और यीशु के जन्म का संदेश देते हैं, जिससे पूरे इलाके में उल्लास का माहौल बन जाता है।
कैरोल सिंगिंग कर रहे ईसाई सदस्यों ने बताया कि कैरोल का मतलब ‘आनंद का गीत’ होता है, और इन गीतों के माध्यम से यीशु के जन्म की शुभ सूचना और प्रेम, त्याग, मानवता का संदेश दिया जाता है।यह परंपरा समुदाय के सदस्यों के बीच जुड़ाव बढ़ाती है और छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इसमें उत्साह से शामिल होते हैं।

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