#BNNINDIANEWS
चंडीगढ़, 1 दिसम्बर 2025: सीएसआईआर-सूक्ष्मजीव प्रौद्योगिकी संस्थान (इमटैक) ने आज प्रीक्लिनिकल से क्लिनिकल: विकसित भारत के लिए अनुसंधान, पशु कल्याण, औषधि खोज और भेषज नवाचार के बिंदुओं के जोड़ने के विषय पर तीन दिवसिय प्रयोगशाला पशु विज्ञान संघ सम्मेलन (लासाइकॉन) 2025 का आयोजन किया। यह ऐतिहासिक आयोजन वैज्ञानिकों, नियामकों, पशु कल्याण विशेषज्ञों, नवप्रवर्तकों, छात्रों और शिक्षा जगत व उद्योग जगत के प्रमुख हितधारकों के एक अंतःविषय समुदाय को एक साथ लाएगा।
भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी; कृषि; जल शक्ति मंत्रालय के पूर्व राज्य मंत्री डॉ. संजीव बालियान इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। स्वयं एक पशु चिकित्सा वैज्ञानिक होने के नाते डॉ. बालियान ने लासाइकॉन के आयोजन में सीएसआईआर-इमटैक के प्रयासों की सराहना की, जो आत्मनिर्भर भारत का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने वैज्ञानिकों से आम आदमी और विशेष रूप से कृषि के लिए लाभकारी अनुसंधान क्षेत्रों में हाथ आजमाने का आह्वान किया। लासाइकॉन 2025 का उद्देश्य महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और नैतिक अंतर्संबंधों को संबोधित करना है—जैव चिकित्सा अनुसंधान में मानवीय, जिम्मेदार और अत्याधुनिक दृष्टिकोणों को बढ़ावा देना, औषधि खोज में तेजी लाना और सूचित वैज्ञानिक संवाद और अंतर-क्षेत्रीय सहयोग के माध्यम से औषधि नवाचार को बढ़ावा देना।
सीएसआईआर-इमटैक के निदेशक डॉ. संजीव खोसला ने कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों और वैज्ञानिकों का स्वागत करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि प्रयोगशाला पशुओं के कल्याण के लिए एक मज़बूत तंत्र विकसित करना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि किसी भी दवा खोज कार्यक्रम में अधिकांश विफलताएँ पूर्व-नैदानिक चरण में ही होती हैं। उन्होंने उन नए तरीकों पर भी प्रकाश डाला जिनमें ऑर्गेनॉइड जैसे पशु मॉडलों की जगह लेने की क्षमता है, क्योंकि उनकी मानव-विशिष्ट, त्रि-आयामी संरचना रोग मॉडलिंग, दवा जाँच और विषाक्तता परीक्षण के लिए मानव अंगों की बेहतर नकल करती है।
पशु चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए गुजरात जैव प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जीबीयू) के महानिदेशक डॉ संजीव बालियान और डॉ सुबीर मजूमदार को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड भी दिया गया। पशु अध्ययन और प्रयोगशाला पशुओं के संचालन में उनके काम के लिए प्रतिष्ठित शोधकर्ताओं को विभिन्न श्रेणियों के तहत लासाइ (LASAI) पुरस्कार भी दिए गए। लुधियाना में स्थित गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (जीएडीवीएएसयू) के कुलपति प्रो. जेपीएस गिल, गुजरात स्थित जीबीयू के महानिदेशक डॉ. सुबीर मजूमदार और लासाइकॉन-2025 के मुख्य वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. जी. राजमोहन ने अपने-अपने संबोधनों में इस आयोजन का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया, जो नैतिक पूर्व-नैदानिक अनुसंधान को परिवर्तनकारी नैदानिक और औषधि संबंधी प्रगति से जोड़ने वाले प्रभावशाली संवाद और सहयोग को संभव बनाएगा। उन्होंने इमटैक के विश्वस्तरीय बुनियादी ढाँचे और वैज्ञानिकों की सराहना की, जिन्होंने देश भर के नवोदित युवा शोधकर्ताओं के लिए एक प्रेरक की भूमिका निभाई है।
अगले दो दिनों में, वैज्ञानिक कार्यक्रम पशु कल्याण, नैतिकता और विकल्प, अनुवादात्मक अनुसंधान और प्रीक्लिनिकल मॉडल, औषधि खोज और भेषज नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से डिजिटल परिवर्तन और नियामक ढाँचे एवं गुणवत्ता मानकों सहित प्रमुख विषयों पर चर्चा करेगा। कार्यक्रम के दौरान, वैज्ञानिक लेखों और संदेशों से युक्त लासाइकॉन 2025 के उत्सव की स्मृति में एक स्मारिका का भी अनावरण किया गया। लासाइकॉन 2025 के मुख्य वैज्ञानिक और आयोजन सचिव डॉ. नीरज खत्री ने इस कार्यक्रम का मंच तैयार किया, जिसका उद्देश्य प्रयोगशाला पशु विज्ञान, जैव चिकित्सा अनुसंधान, पशु कल्याण और प्रीक्लिनिकल औषधि विकास के क्षेत्र में वैज्ञानिक संपर्क और नवाचार को बढ़ावा देना है।
सीएसआईआर-इमटैक में उत्कृष्टता के लिए एक राष्ट्रीय केंद्र है और इसकी स्थापना 1984 में हुई थी। इमटैक की परिकल्पना एवं मिशन मौलिक खोजों द्वारा मजबूत ट्रांसलेशनल पारिस्थितिकी तंत्र बनाना और अत्याधुनिक प्रक्रियाओं तथा प्लेटफार्मों के साथ क्रमशः अपूर्ण स्वास्थ्य सेवा और औद्योगिक जरूरतों को पूरा करना है।