चंडीगढ़ – श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश पर्व के पावन अवसर पर गुरुद्वारा कलगीधर खेड़ी, सेक्टर 20 में धार्मिक समागम श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया।
इस मौके पर गुरबाणी की कथा विचार पंथ प्रसिद्ध ज्ञानी भाई साहिब भाई जसवंत सिंह जी परवाना द्वारा प्रस्तुत की गई, जिसमें गुरु ग्रंथ साहिब जी के पहले प्रकाश पर्व की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि स्मरण कराई गई कि श्री गुरु अर्जुन देव जी ने गुरुओं की वाणियों को संकलित कर भाई गुरदास जी की लिखत के माध्यम से श्री आदि ग्रंथ का संपादन करवाया और इसका पहला प्रकाश 1 सितंबर 1604 ई. को श्री हरिमंदर साहिब अमृतसर में बाबा बुढ़ा जी की हज़ूरी में किया गया था।
रस भरे कीर्तन की सेवा भाई नवनीत सिंह जी, हज़ूरी रागी श्री दरबार साहिब अमृतसर ने निभाई। संगतों ने गुरु घर में हाज़िरी भरी और अटूट लंगर भी वरता। संगतों ने गुरबाणी के उपदेशों को अपने जीवन में अमल करने का संकल्प लिया और गुरु साहिब के आगे नतमस्तक होकर सरबत के भले के लिए अरदास की।
प्रबंधक कमेटी के मुख्य सेवक गुरइंदर बीर सिंह जी, सचिव स. हुकम सिंह जी, मोहनदर सिंह जी, गुरप्रीत सिंह जी, हरमीत सिंह जी, बलजिंदर सिंह जी, सुखजिंदर सिंह जी, जगदीश सिंह जी, निरंजन सिंह जी, प्रितपाल सिंह जी और अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे। गुरइंदर बीर सिंह जी ने गुरु ग्रंथ साहिब जी और समस्त साध संगत का धन्यवाद किया, जिनके आशीर्वाद से यह सभी कार्य पूर्ण हुए।