चंडीगढ़, 21 जुलाई, 2026: नाबार्ड हरियाणा क्षेत्रीय कार्यालय ने 21 जुलाई 2026 को हरियाणा सरकार, भारतीय रिज़र्व बैंक, बैंकों, सहकारी संस्थाओं, कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ), स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) तथा विकास भागीदार संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की सहभागिता के साथ नाबार्ड का 45वां स्थापना दिवस मनाया।
इस कार्यक्रम में श्री अनुराग रस्तोगी, मुख्य सचिव, हरियाणा सरकार ने अपनी उपस्थिति से समारोह की शोभा बढ़ाई। उन्होंने नाबार्ड को राष्ट्र की 44 वर्षों की समर्पित सेवा पूर्ण करने पर बधाई दी और कृषि विकास, वित्तीय समावेशन, संस्था निर्माण तथा सतत आजीविका संवर्धन के माध्यम से ग्रामीण भारत के कायाकल्प में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। उन्होंने नाबार्ड को हरियाणा के एक विश्वसनीय विकास भागीदार बताया और ग्रामीण अवसंरचना, कृषक संस्थाओं, सहकारी समितियों तथा समुदाय-आधारित विकास पहलों को सुदृढ़ करने की दिशा में इसके निरंतर सहयोग की सराहना की।
मुख्य सचिव ने इस बात पर बल दिया कि ग्रामीण हरियाणा के कायाकल्प के लिए सरकारी एजेंसियों, वित्तीय संस्थाओं तथा जमीनी स्तर के संगठनों को शामिल करते हुए एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। उन्होंने विकसित भारत @ 2047 की परिकल्पना के अनुरूप सतत कृषि को बढ़ावा देने, आजीविका के अवसर बढ़ाने, ग्रामीण युवाओं तथा महिलाओं को सशक्त बनाने और लचीले ग्रामीण समुदायों के निर्माण के महत्व को रेखांकित किया।
वर्ष 2026 को अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए, उन्होंने संस्थागत वित्त, प्रौद्योगिकी, कौशल विकास, बाजारों तथा नेतृत्व के अवसरों तक अधिक पहुंच सुनिश्चित कर कृषि में महिलाओं के योगदान को पहचानने और सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नाबार्ड राज्य में महिला-नेतृत्व विकास को आगे बढ़ाने तथा समावेशी एवं सतत ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाना जारी रखेगा।
इस अवसर पर बोलते हुए, श्रीमती निवेदिता तिवारी, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड हरियाणा क्षेत्रीय कार्यालय ने हरियाणा में ग्रामीण विकास क्षेत्र के साथ नाबार्ड की गहन सहभागिता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (आरआईडीएफ) के अंतर्गत, नाबार्ड ने हरियाणा के लिए लगभग ₹15,056 करोड़ स्वीकृत किए हैं और 6,175 अवसंरचना परियोजनाओं को सहयोग प्रदान किया है, जिससे ग्रामीण संपर्क, सिंचाई, पेयजल सुविधाओं तथा समग्र आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिला है।
उन्होंने आगे बताया कि नाबार्ड ने 710 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के कंप्यूटरीकरण और डिजिटलीकरण तथा राज्यभर में 131 कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के संवर्धन के माध्यम से ग्रामीण संस्थाओं को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन एफपीओ ने 63,369 से अधिक किसानों को संगठित किया है, जिनमें 14,017 महिला सदस्य शामिल हैं, जिससे किसानों को बाजारों, प्रौद्योगिकी तथा मूल्य श्रृंखलाओं तक पहुंच बेहतर बनाने में सहायता मिली है।
मुख्य महाप्रबंधक ने कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नाबार्ड के प्रयासों को रेखांकित किया, जिनसे 2022-23 से अब तक 5,010 से अधिक महिलाओं को लाभ पहुंचा है। उन्होंने बताया कि इन कार्यक्रमों ने डेयरी पालन, खाद्य प्रसंस्करण, मशरूम की खेती, हस्तशिल्प, सिलाई तथा अन्य ग्रामीण उद्यमों में सतत आजीविका के अवसर सृजित किए हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि 28 एफपीओ को कुल ₹11.12 करोड़ की ऋण सहायता के साथ ऋण से जोड़ा गया है, जबकि नौ एफपीओ को ₹60.38 लाख की इक्विटी अनुदान सहायता प्रदान की गई है। नाबार्ड ने वाटरशेड विकास, भूजल प्रबंधन, सूक्ष्म सिंचाई, धान की सीधी बुवाई (डीएसआर), सब्जी क्लस्टर संवर्धन तथा किसानों की आय एवं सततता बढ़ाने के उद्देश्य से अन्य नवीन हस्तक्षेपों के माध्यम से जलवायु-अनुकूल कृषि को भी बढ़ावा दिया है।
मुख्य महाप्रबंधक ने हरियाणा में नवाचार को बढ़ावा देने, ग्रामीण संस्थाओं को सुदृढ़ करने, महिला-नेतृत्व विकास को प्रोत्साहित करने तथा सतत एवं समावेशी विकास का समर्थन करने के प्रति नाबार्ड की प्रतिबद्धता को दोहराया।
समारोह के दौरान, राज्य में नाबार्ड द्वारा समर्थित विभिन्न हस्तक्षेपों की प्रमुख विकासात्मक पहलों, उपलब्धियों तथा प्रभाव को दर्शाने वाली एक कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया गया। कृषि तथा संबद्ध गतिविधियों के ऋण नियोजन, परियोजना मूल्यांकन तथा वित्तपोषण में बैंकों एवं अन्य हितधारकों हेतु संदर्भ के रूप में कार्य करने के लिए एक यूनिट कॉस्ट बुक भी जारी की गई।
ग्रामीण विकास तथा संस्था निर्माण में उनके उत्कृष्ट योगदान के सम्मान में, कार्यक्रम के दौरान चयनित प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स), जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी), कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ), शिल्पकारों तथा महिला किसानों उद्यमियों को सम्मानित किया गया।
इस कार्यक्रम में शिल्पकारों, एफपीओ तथा ओएफपीओ द्वारा एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया, जिसमें कृषि उपज, प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद, हस्तशिल्प तथा अन्य मूल्य वर्धित उत्पादों को प्रदर्शित किया गया, जो ग्रामीण उत्पादक समूहों की बढ़ती उद्यमशीलता क्षमताओं को दर्शाता है। कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 के महत्व को भी रेखांकित किया गया, जिसमें कृषि तथा संबद्ध क्षेत्रों में महिलाओं के नेतृत्व, उद्यमिता तथा भागीदारी को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।