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‘लेडी सिंघम’ के रूप में बनी नई पहचान: 13वीं बटालियन सीआरपीएफ की प्रथम महिला कमांडेंट श्रीमती कमल सिसोदिया ने पंजाब एवं चंडीगढ़ के लोगों के दिलों पर छोड़ी अमिट छाप
चंडीगढ़। 13वीं बटालियन, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की प्रथम महिला कमांडेंट श्रीमती कमल सिसोदिया ने अपना सफल एवं प्रेरणादायी कार्यकाल पूर्ण करते हुए नेतृत्व, सेवा एवं जनसरोकारों की ऐसी मिसाल कायम की, जिसने पंजाब एवं चंडीगढ़ के लोगों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने न केवल बटालियन का कुशल नेतृत्व किया, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग से जुड़कर सीआरपीएफ की एक संवेदनशील, जनहितैषी एवं प्रेरणादायी छवि स्थापित की।
पंजाब के माननीय मुख्यमंत्री सहित ज़ेड प्लस, ज़ेड एवं वाई श्रेणी के अति विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा जैसे अत्यंत संवेदनशील दायित्व का सफल नेतृत्व करते हुए उन्होंने पूरे कार्यकाल में “जीरो ऑपरेशनल एरर” का उत्कृष्ट रिकॉर्ड बनाए रखा। उनके नेतृत्व में 13वीं बटालियन को बेस्ट एडमिनिस्ट्रेटिव बटालियन एवं बेस्ट कॉस्ट इफेक्टिव बटालियन जैसे प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए, जो उनकी कुशल प्रशासनिक क्षमता एवं दूरदर्शी नेतृत्व का प्रमाण हैं।
एक महिला कमांडेंट के रूप में उन्होंने अनेक अवसरों पर बाइक रैलियों एवं साइकिल रैलियों का स्वयं अग्रिम पंक्ति से नेतृत्व किया। स्वच्छ भारत अभियान, हर घर तिरंगा अभियान, नशामुक्ति जनजागरूकता अभियान तथा अन्य जनहित कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भागीदारी ने समाज के समक्ष महिला नेतृत्व का एक सशक्त एवं प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। उनकी यह छवि विशेष रूप से युवाओं एवं छात्राओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय रही तथा अनेक युवाओं को सशस्त्र बलों में शामिल होकर राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित किया।
अपने आधिकारिक दायित्वों से आगे बढ़कर उन्होंने दिव्यांगजनों, एसिड अटैक पीड़िताओं, महिलाओं, युवाओं एवं समाज के वंचित वर्गों के लिए अनेक जनकल्याणकारी पहल कीं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, कौशल विकास प्रदर्शनियों, महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों, प्रेरक व्याख्यानों, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों तथा सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने हजारों नागरिकों को जोड़ते हुए सीआरपीएफ और समाज के बीच विश्वास एवं सहभागिता को नई मजबूती प्रदान की। दिव्यांगजनों के साथ विशेष कार्यक्रम आयोजित कर उन्होंने समाज के प्रति अपनी संवेदनशीलता एवं मानवीय मूल्यों का भी परिचय दिया।
अपने निर्भीक व्यक्तित्व, दृढ़ निर्णय क्षमता एवं मानवीय संवेदनशीलता के कारण वे अधिकारियों, जवानों एवं आम नागरिकों के बीच स्नेहपूर्वक “लेडी सिंघम” के नाम से प्रसिद्ध हो गईं। उनके नेतृत्व, सहज व्यवहार एवं जनसेवा की भावना ने उन्हें विशेष रूप से महिलाओं एवं युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बना दिया।
महिला सशक्तिकरण, समाज सेवा एवं नेतृत्व के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें महिला एक्सीलेंस इन एंटरप्रेन्योरशिप अवॉर्ड, आयरन लेडी अवॉर्ड, महिला अचीवर अवॉर्ड तथा महिला उद्यमी अवॉर्ड सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया। उनके कार्यों की सराहना पंजाब के माननीय राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक, पंजाब के माननीय मुख्यमंत्री तथा अनेक प्रतिष्ठित संस्थाओं एवं गणमान्य व्यक्तियों द्वारा की गई।
उनके विदाई समारोह में विभिन्न सरकारी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, प्रख्यात एवं विशिष्ट हस्तियाँ, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। अपने संबोधन में वक्ताओं ने उन्हें “लेडी सिंघम”, “सच्ची प्रेरणा”, “दूरदर्शी नेता” एवं “एक उत्कृष्ट इंसान” बताते हुए कहा कि उन्होंने केवल 13वीं बटालियन का सफल नेतृत्व ही नहीं किया, बल्कि अपने कार्यों से पंजाब एवं चंडीगढ़ में सीआरपीएफ की जनहितैषी एवं संवेदनशील छवि को भी नई पहचान दिलाई। सभी ने उनके नए दायित्व के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।
13वीं बटालियन की प्रथम महिला कमांडेंट के रूप में श्रीमती कमल सिसोदिया ने यह सिद्ध किया कि सच्चा नेतृत्व केवल परिचालन उपलब्धियों तक सीमित नहीं होता, बल्कि समाज के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में भी निहित होता है। उनका कार्यकाल साहस, सेवा, संवेदनशीलता एवं महिला नेतृत्व का एक प्रेरणादायी अध्याय बनकर सदैव स्मरणीय रहेगा तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।