कलाग्राम में सांग उत्सव सम्पन्न, कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों ने बांधा समां

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“कह के उल्टा नहीं फिरूँगा…”
“पकड़ कलेजा रोन लागी…”। रागिनियों से गूंजा कलाग्राम

चंडीगढ़:
नॉर्थ जोन कल्चरल सेंटर, कलाग्राम, मनीमाजरा में आयोजित सांग उत्सव सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। उत्सव के दौरान हरियाणवी लोकनाट्य ‘सांग’ की जीवंत परंपरा ने एक बार फिर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम में रामशरण एंड पार्टी, करनाल और संजय मलिक एंड पार्टी, मुजफ्फरनगर ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से समां बांधा। कलाकारों ने पारंपरिक किस्सों और सांग के मुखड़ों के माध्यम से प्रेम, वीरता और सामाजिक संदेशों को मंच पर जीवंत कर दिया।

करनाल के सांगी राम शरण ने राजकुमार चन्द्रहास के किस्से और श्री कृष्ण-सुदामा की रागिनी प्रस्तुत कर दर्शकों का दिल जीत लिया। उनकी प्रस्तुति में भावनात्मक गहराई और लोकधुनों की मिठास देखने को मिली।

वहीं संजय मलिक ने परोपकारी राजा वीर विक्रमजीत खंडेराव परी” का सांग सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। उनकी रागिनी के मुखड़े —
“कह के उल्टा नहीं फिरूँगा…”
और
“पकड़ कलेजा रोन लागी…”
ने दर्शकों को भावुक कर दिया और पूरे पंडाल में तालियों की गूंज छा गई।

राम शरण एंड पार्टी ने अपने सांग में लोककथाओं की मिठास और हास्य का रंग घोला, वहीं संजय मलिक एंड पार्टी ने प्रभावशाली अदायगी से पारंपरिक किस्सों को जीवंत बना दिया।

सांग एक प्राचीन स्टोरी टेलिंग विधा है, जो टीवी, इंटरनेट और सोशल मीडिया से पहले से ही लोगों के मनोरंजन और जागरूकता का सशक्त माध्यम रही है। यह कला आज भी हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखते हुए नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रही है।

इस अवसर पर सेंटर डायरेक्टर फुरकान खान ने खराब मौसम के बावजूद बड़ी संख्या में पहुंचे सांग प्रेमियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सांग सुनने और कहने वालों की कमी नहीं है, लेकिन इस लोककला को आमजन तक और अधिक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।

उत्सव ने यह साबित कर दिया कि पारंपरिक कला रूप आज भी लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बनाए हुए हैं।

 

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