पंचकूला में ‘खैर माफिया’ पर बड़ा प्रहार: कटाई से लेकर खरीद-फरोख्त और ट्रांसपोर्ट तक पूरा नेटवर्क ध्वस्त,

#bnnindianews पंचकूला में ‘खैर माफिया’ पर बड़ा प्रहार: कटाई से लेकर खरीद-फरोख्त और ट्रांसपोर्ट तक पूरा नेटवर्क ध्वस्त, वन अधिकारी समेत 11 आरोपी गिरफ्तार, लाखों की लकड़ी, कैश, 2 वाहन व कटाई में प्रयोग औजार बरामद

पंचकूला/ 18 मार्च :- पंचकूला पुलिस ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी और निर्णायक कार्रवाई करते हुए अवैध कटाई और वन संपदा की चोरी में लिप्त एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। थाना चण्डीमंदिर क्षेत्र के आसरेवाली सुरक्षित वन क्षेत्र में खैर के पेड़ों की बड़े पैमाने पर अवैध कटाई और तस्करी के इस गंभीर मामले में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वयं संज्ञान लेते हुए पंचकूला पुलिस कमिश्नर (एडीजीपी) शिवास कविराज को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों के तहत पुलिस कमिश्नर ने तुरंत एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया, जिसकी कमान एसीपी क्राइम अरविंद कंबोज को सौंपी गई, जिसमें टीम ने त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करते हुए एक वन विभाग कर्मचारी समेत कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले का पर्दाफाश किया है।

मामले की शुरुआत 02 मार्च 2026 को हुई, जब वन खंड अधिकारी रघुविन्द्र सिंह द्वारा थाना चण्डीमंदिर में शिकायत दर्ज करवाई गई कि आसरेवाली सुरक्षित वन क्षेत्र में खैर के पेड़ों की अवैध कटाई कर चोरी की गई है। वन विभाग द्वारा 25 फरवरी को की गई जांच में लगभग 400 से 500 पेड़ों की अवैध कटाई सामने आई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए 10 मार्च 2026 को मामला दर्ज कर मामलें की जांच शुरु की।

इंस्पेक्टर दलीप सिंह की अगुवाई में टीम ने तकनीकी व गुप्त सूचना के आधार पर 12 मार्च को मुख्य आरोपी इमरान उर्फ मान्ना को गिरफ्तार किया। इसके साथ ही हबीब खान, शकिल, सराफत, यासिन, समीम को भी उसी दिन गिरफ्तार कर 13 मार्च को आरोपियों को न्यायालय में पेश कर 3 दिन के पुलिस रिमांड लिया गया, जिसके दौरान गिरोह के अन्य सदस्यों नानक और तकी खान सहित अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया।

जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी दिलबहादुर वासी जिला सोलन, हिमाचल प्रदेश चोरी की गई खैर की लकड़ी को खरीदकर आगे बेचता था, जबकि अली मोहम्मद उर्फ रोशन इस अवैध नेटवर्क में ट्रांसपोर्टर की भूमिका निभा रहा था। आरोपियों ने पूछताछ में खुलासा किया कि वे संगठित तरीके से जंगल में खैर के पेड़ों की कटाई कर उन्हें अवैध रूप से बाजार में बेचते थे।

जांच में पता चला कि शिकायतकर्ता स्वयं वन दरोगा रघुविन्द्र सिंह की भूमिका संदिग्ध पाई गई। जांच में खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी इमरान इस एवज में वन अधिकारी को हर महीने घूस देता था। इसके बाद पुलिस ने 15 मार्च को उसे गिरफ्तार कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की। 16 मार्च को आरोपी इमरान, दिलबहादुर और रघुविन्द्र सिंह को कोर्ट में पेश कर तीन दिन का पुलिस रिमांड लिया गया, जबकि अन्य आरोपियों को रिमांड अवधि पूरी होने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

डीसीपी क्राइम एंड ट्रैफिक मनप्रीत सिंह सूदन: इस पूरे मामले की भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2), वन अधिनियम की धारा 32, 33, वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 27, 29 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत जांच की जा रही है।

पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर लगभग 10 क्विंटल 50 किलोग्राम खैर की लकड़ी, अवैध कमाई की नकदी, पेड़ काटने के औजार तथा दो पिकअप वाहन बरामद किए हैं। अब तक गिरफ्तार 11 आरोपियों में 8 कटाई करने वाले, एक खरीददार, एक ट्रांसपोर्टर और एक वन अधिकारी शामिल है। पुलिस द्वारा मामले से जुड़े अन्य ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।

पंचकूला पुलिस कमिश्नर शिवास कविराज का सख्त बयान: वन संपदा हमारी राष्ट्रीय धरोहर है और इसकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ पंचकूला पुलिस जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है। यह महज पेड़ों की चोरी नहीं, बल्कि एक संगठित पर्यावरणीय अपराध था। हमारे एसआईटी के अथक प्रयासों से हमने न केवल गिरोह के मुख्य सरगना और ट्रांसपोर्टर को पकड़ा है, बल्कि विभाग के भीतर मौजूद अधिकारी को भी बेनकाब किया है जो रक्षक होकर भक्षक की भूमिका निभा रहा था। हमने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की कड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। हमारी टीमें अभी भी उन सभी ठिकानों पर रेड कर रही हैं जहाँ इस लकड़ी को खपाया जाता था। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इस सिंडिकेट की जड़ें जहाँ तक भी फैली हैं, उन्हें पूरी तरह उखाड़ फेंका जाए।

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