‘उर्जावरण’ में ऊर्जा संरक्षण और डिकार्बोनाइजेशन पर विशेषज्ञों ने किया मंथन

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चंडीगढ़, 7 मार्च: इंडियन सोसाइटी ऑफ हीटिंग, रेफ्रिजरेटिंग एंड एयर कंडीशनिंग इंजीनियर्स (इशरे) के चंडीगढ़ चैप्टर ने होटल द ललित, चंडीगढ़ में अपना प्रमुख सम्मेलन “उर्जावरण – एनर्जी कंजरवेशन एंड डिकार्बोनाइजेशन” आयोजित किया। इस सम्मेलन में देशभर से विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं और उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लेकर भारत में टिकाऊ और कम-कार्बन भवनों के निर्माण की दिशा में रणनीतियों पर चर्चा की।

दिनभर चले इस तकनीकी सम्मेलन में 200 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें एचवीएसीआर और भवन निर्माण से जुड़े आर्किटेक्ट, इंजीनियर, कंसल्टेंट, कॉन्ट्रैक्टर, डेवलपर और सरकारी अधिकारी शामिल रहे। सम्मेलन में पंजाब एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (पेडा), पीजीआई, आईआईएसईआर मोहाली, सेमीकंडक्टर लेबोरेटरी, सीएसआईआर और आईआईटी रोपड़ जैसे प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

उर्जावरण के संयोजक अनंत सिंह ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए डिकार्बोनाइजेशन की दिशा में ठोस कदम उठाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि एयर कंडीशनिंग और रेफ्रिजरेशन उद्योग ऊर्जा खपत और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मुख्य वक्ता के रूप में अपने संबोधन में रोहित राज, प्रेसिडेंट-इलेक्ट, इशरे चंडीगढ़ चैप्टर ने कहा कि कम-कार्बन इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में आगे बढ़ने के लिए उन्नत ऊर्जा-कुशल तकनीकों को अपनाना और उद्योग, शोध संस्थानों तथा नीति-निर्माताओं के बीच सहयोग को मजबूत करना बेहद जरूरी है।

इस अवसर पर मनी खन्ना, मैनेजर, पेडा ने बताया कि विश्वभर में भवन क्षेत्र ऊर्जा से जुड़े लगभग 40 प्रतिशत कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में कई पहलें की गई हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि इन प्रयासों को आगे बढ़ाकर भवनों के डिकार्बोनाइजेशन पर विशेष ध्यान दिया जाए।

सम्मेलन के दौरान ऊर्जा संरक्षण मानकों, एचवीएसी उद्योग में डिकार्बोनाइजेशन, शहरी विकास में पैसिव कूलिंग तकनीक, जियोथर्मल और हाइब्रिड कूलिंग सिस्टम तथा भवन प्रबंधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका जैसे विषयों पर तकनीकी सत्र और पैनल चर्चा आयोजित की गई। इन सत्रों में आशीष राखेजा, आशु गुप्ता. आर्किटेक्ट माधव रमन, आर्किटेक्ट दीपेंद्र प्रसाद, इंजीनियर रविजीत सिंह और पूर्व आईएएस अधिकारी विवेक अत्रे सहित कई विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।

“इंडियन बिल्ट एनवायरनमेंट में एआई: वर्तमान वास्तविकता या भविष्य की संभावना?” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में प्रतिभागियों ने विशेष रुचि दिखाई और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए उभरती तकनीकों पर चर्चा की। सभी प्रतिनिधियों ने भारत सरकार के लक्ष्य के अनुरूप वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने के संकल्प को दोहराया।

कार्यक्रम का समापन मुकुल ग्रोवर, अध्यक्ष, इशरे चंडीगढ़ द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।

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