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डॉ. अरुणाभा घोष, सीईओ, काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू), ने कहा, “आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने एक महत्वपूर्ण संकेत दिया है कि भारत के विकास की कहानी अपने नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता और शहरों की दीर्घकालिक सततशीलता पर तेजी से केंद्रित हो रही है। सर्वेक्षण ने शहरों में होने वाली गर्मी (अर्बन हीट), पानी की कमी, अपशिष्ट प्रबंधन (वेस्ट मैनेजमेंट) और जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचे की आपस में जुड़ी चुनौतियों को पहचाना है और बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण व शहरों के स्तर पर जलवायु से संबंधित योजनाओं के बीच तालमेल लाने की अपील की है। सर्वेक्षण ने यह भी स्वीकार किया है कि बेहतर शहरों के लिए कुशल संस्थानों, वित्तपोषण और व्यवहार परिवर्तन की जरूरत है।
उपचारित अपशिष्ट जल को दोबारा इस्तेमाल करने (circular water reuse) पर ध्यान देना पर्यावरणीय जरूरत और आर्थिक अवसर दोनों है। इसके साथ, ग्रीन बॉन्ड जैसे उपायों के जरिए नगरपालिकाओं के वित्तपोषण को मजबूत करने की अपील बताती है कि शहरों में बेहतर परिणामों को पाने के लिए कुशल सार्वजनिक निवेश और मजबूत स्थानीय क्षमता की जरूरत है। इसमें हीट एक्शन प्लानिंग पर जोर दिया जाना बताता है कि कैसे जोधपुर से लेकर अहमदाबाद और उत्तराखंड तक प्रादेशिक नेतृत्व पहले से ही जलवायु जोखिम को जमीनी अनुकूलन में बदल रहा है, सार्वजनिक स्वास्थ्य और आजीविका को सुरक्षा दे रहा है।
हम आर्थिक सर्वेक्षण में सीईईडब्ल्यू के रिसर्च को मान्यता दिए जाने से उत्साहित हैं, जिसमें सर्कुलर इकोनॉमी (चक्रीय अर्थव्यवस्था), हीट एक्शन प्लानिंग और शहरी अपशिष्ट प्रबंधन के लिए रूट-कॉज सॉल्यूशन मैट्रिक्स शामिल है। हम राज्यों और शहरों को लचीले (resilient), समावेशी (inclusive) और भविष्य के लिए तैयार नगरीय प्रणालियां बनाने में अपना सहयोग जारी रखने के लिए उत्सुक हैं।”