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चंडीगढ़ । कांग्रेस ने मोदी सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए शनिवार को लेबर चौक, सेक्टर-44 में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। धरने में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ-साथ चंडीगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोग और मजदूर वर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुआ।
धरने का नेतृत्व चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष एच. एस. लक्की ने किया। इस मौके पर इंडियन यूथ कांग्रेस के सचिव एजाज़ चौधरी, नगर निगम के वरिष्ठ उपमहापौर जसबीर बंटी, उपमहापौर तरुणा मेहता, पार्षद सचिन गालव और चंडीगढ़ यूथ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक लुबाना भी अपने युवा साथियों के साथ मौजूद रहे।
धरने को संबोधित करते हुए एच. एस. लक्की ने कहा कि मनरेगा आम आदमी के अधिकार पर आधारित एक ऐतिहासिक कानून है, जिसने ग्रामीण भारत में रोज़गार की गारंटी देकर लाखों परिवारों को संबल दिया। यह योजना मांग आधारित थी, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 100 दिनों के रोज़गार का कानूनी अधिकार सुनिश्चित किया गया था। पंचायत या स्थानीय स्तर पर जैसे ही काम की मांग उठती थी, सरकार को रोज़गार उपलब्ध कराना पड़ता था। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली और पलायन पर भी रोक लगी।

लक्की ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने मनरेगा की मूल भावना को बदलते हुए इसे मांग आधारित योजना से हटाकर आपूर्ति आधारित कार्यक्रम बना दिया है। उन्होंने कहा कि नए प्रावधानों के तहत फंड का आवंटन पूरी तरह सरकार की मर्जी पर निर्भर हो जाएगा, जिससे लोगों की जरूरतों और मांग का कोई महत्व नहीं रहेगा। उन्होंने राज्य सरकारों के अंशदान को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इससे यह योजना व्यवहारिक रूप से समाप्त हो जाएगी, क्योंकि अधिकांश राज्य पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
चंडीगढ़ कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता राजीव शर्मा ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता मनरेगा से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने से बेहद आहत और नाराज़ हैं। धरने के दौरान कार्यकर्ताओं ने तख्तियां लेकर नारेबाजी की और महात्मा गांधी के सम्मान में अपनी आवाज बुलंद की।
अंत में कांग्रेस ने गरीब और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष को और तेज करने तथा मनरेगा को उसकी मूल भावना के साथ बहाल कराने का संकल्प