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8 से 11 जनवरी 2026 तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को राष्ट्रीय महत्व मिल रहा है।
10 जनवरी, 2026 को, प्रधानमंत्री सोमनाथ में होंगे और स्वाभिमान पर्व के अवसर पर प्रमुख आध्यात्मिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे। शाम के समय, वे मंदिर परिसर में आयोजित ओंकार मंत्र जाप में सम्मिलित होंगे। वे वहां चल रहे 72 घंटे के अखंड ओंकार जाप में शामिल होंगे, जो आस्था की निरंतरता, एकता और सभ्यता की शक्ति का प्रतीक है। उसी शाम, प्रधानमंत्री स्वाभिमान पर्व समारोह में आयोजित भव्य ड्रोन शो का भी अवलोकन करेंगे।

11 जनवरी, 2026 को प्रधानमंत्री ‘शौर्य यात्रा’ का नेतृत्व करेंगे, यह यात्रा सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के हिस्से के रूप में आयोजित एक प्रतीकात्मक जुलूस है। यह शौर्य यात्रा उस साहस, बलिदान और अदम्य भावना का प्रतिनिधित्व करती है जिसने सदियों से विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सोमनाथ को सुरक्षित रखा। यात्रा के बाद, प्रधानमंत्री सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे।
प्रधानमंत्री बाद में सोमनाथ में जन समूह को संबोधित करते हुए मंदिर के सभ्यतागत महत्व, स्वाभिमान पर्व की सार्थकता और सोमनाथ से जुड़े विश्वास, जीवंतता और स्वाभिमान के चिरस्थाई संदेश पर प्रकाश डालेंगे।
- सोमनाथ स्वाभिमान पर्व (8-11 जनवरी, 2026) सोमनाथ मंदिर पर 1026 में हुए पहले अभिलिखित आक्रमण के 1000 वर्ष पर स्मरणोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है।
- प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी इस अवसर पर मुख्य आध्यात्मिक और स्मरण कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए 10-11 जनवरी, 2026 को सोमनाथ की यात्रा करेंगे।
- प्रधानमंत्री श्री मोदी श्री सोमनाथ न्यास के प्रमुख हैं। इस मंदिर की विशेषता 150 फुट का शिखर, 1666 स्वर्ण मंडित कलश और 14200 ध्वज हैं।
- प्रत्येक वर्ष 92-97 लाख श्रद्धालु सोमनाथ मंदिर के दर्शन करते हैं।
- सोमनाथ में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका है। मंदिर के 906 कर्मियों में से 262 महिलाएं हैं। वे बिल्व वन, प्रसाद वितरण और मंदिर भोज सेवाओं का प्रबंध देखती हैं।
- सोमनाथ मंदिर न्यास में 363 महिलाएं कार्यरत हैं। वार्षिक 9 करोड़ रुपए की आय वाला यह न्यास महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा दे रहा है।
सर्वशक्तिमान भगवान शिव ने, अपने आदिनाथ स्वरूप में, समस्त प्राणियों के कल्याण हेतु अपने शाश्वत सिद्धांत और संकल्प से इस अत्यंत शक्तिशाली और पवित्र क्षेत्र को प्रकट किया, जिसे प्रभास खंड के नाम से जाना जाता है। दिव्य आभा से आलोकित यह पुण्य भूमि वह स्थान है जहाँ मनुष्यों को आध्यात्मिक पूर्णता, पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है।