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चंडीगढ़ प्रेस क्लब, में रविवार को काव्य-संग्रह “मैं सागर खारा – तुम नदी मीठी” का लोकार्पण साहित्यिक गरिमा एवं आत्मीय साहित्य-रस की अनुभूतियों के बीच संपन्न हुआ। संग्रह के लेखक डॉ. राजेंद्र धवन ने इसे जीवन की खटास–मिटास, संघर्ष एवं संवेदनाओं का दस्तावेज़ बताया।
लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. माधव कौशिक, अध्यक्ष – राष्ट्रीय साहित्य अकादमी, ने कहा कि डॉ. धवन की रचनाएँ बेहद सरल शब्दों में गहरे भाव रचती हैं। उन्होंने कहा – “धवन की कविता मनुष्य के भीतर उतर जाती है और उसे सोचने पर विवश करती है। यह संग्रह समय और पाठक – दोनों के लिए मूल्यवान साहित्य साबित होगा।”

कार्यक्रम की अध्यक्षता नरेश कौशल ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा –
“साहित्य केवल देखा–सुना नहीं जाता, वह आत्मा से जिया जाता है। धवन की लेखनी इस जीए हुए जीवन की प्रतिध्वनि है।”
विशिष्ट अतिथि, लेखिका एवं फिल्म निर्देशक निशा लूथरा ने काव्य-संग्रह को आज के समय की भावनात्मक आवश्यकता बताते हुए कहा कि यह पुस्तक मानवीय रिश्तों की पारदर्शिता और संवेदना को सशक्त स्वर देती है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रदीप राठौर ने किया। पुस्तक समीक्षा एवं काव्य पाठ सत्र में डॉ. अश्वनी शांडिल्य, शशिधर पुरोहित, डॉ. रेखा मितल,बबिता कपूर एवं पायल भंडारी ने अपनी प्रस्तुतियों से वातावरण को साहित्यिक रस से भर दिया।
डॉ. राजेंद्र धवन ने सभी अतिथियों और उपस्थित साहित्यप्रेमियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा –
“सागर का खारापन और नदी की मिठास — दोनों जीवन के सत्य हैं। यह संग्रह इन्हीं अनुभूतियों को शब्द देने का प्रयास है।”