वेदव्यास जी और शुकदेव जी के जन्म प्रसंगों से गूंजा कथा पंडाल

Bharat News Network : चंडीगढ़ 26अक्तुबर – श्री राधा वल्लभ धाम, सेक्टर 45, चंडीगढ़ में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के द्वितीय दिवस पर कथा व्यास श्रद्धेय श्री विजय शास्त्री जी ने वेदव्यास जी, शुकदेव जी के दिव्य जन्म प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा का आरंभ मंगलाचरण एवं श्रीमद् भागवत की महिमा से हुआ।

श्री शास्त्री जी ने बताया कि भगवान विष्णु के कल्याणकारी अवतार के रूप में वेदव्यास जी ने वेदों का विभाजन कर मानवता को ज्ञान का अमूल्य खजाना प्रदान किया। तत्पश्चात् उन्होंने शुकदेव जी के जन्म प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि शुकदेव जी बाल्यावस्था से ही ब्रह्मज्ञान में स्थित थे, और उनके जन्म से ही वायु में ‘शांति और वैराग्य’ का संदेश फैल गया था।

कथा के अगले प्रसंग में कुन्ती चरित्र तथा भीष्म पितामह के त्याग और प्रतिज्ञा का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया गया। श्री शास्त्री जी ने कहा “भीष्म का चरित्र हमें यह सिखाता है कि जब तक जीवन है, धर्म और प्रतिज्ञा पर अडिग रहना ही सच्ची भक्ति है।” अंत में राजा परीक्षित के श्राप की कथा सुनाते हुए उन्होंने समझाया कि कैसे भागवत कथा का प्रारंभ इसी श्राप से हुआ, जिसने सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया।

मुख्य अतिथि के तौर पर चंडीगढ़ के सांसद श्री मनीष तिवारी , पार्षद श्री गुरुप्रीत सिंह गाबी, चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष श्री हरमोहिंदर सिंह लक्की उपस्थित रहे व्यास गद्दी से पूज्य व्यास जी से आशीर्वाद प्राप्त किया। सैकड़ों श्रद्धालु भक्तिमय वातावरण में कथा का रसपान कर भाव-विभोर हो उठे। कथा पंडाल में “जय श्री राधे, जय श्रीकृष्ण” के जयकारे गूंजते रहे। आयोजक मंडल ने बताया कि कथा प्रतिदिन सांय 4 बजे से रात्रि 8 बजे तक जारी रहेगी और प्रतिदिन सामूहिक भंडारा भी रखा गया है।

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