नोबेल शांति पुरस्कार 2025: ट्रंप चूके, वेनेजुएला की मारिया कोरिना मचाडो को मिला सम्मान
नोबेल शांति पुरस्कार 2025 का ऐलान हो गया है। इस साल वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को यह सम्मान मिला है। उन्हें अपने देश में लोकतंत्र और मानवाधिकारों के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष करने के लिए चुना गया।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जिन्होंने खुद को सबसे मजबूत दावेदार बताया था, इस साल पुरस्कार से चूक गए। ट्रंप का कहना था कि उन्होंने 7 युद्ध रुकवाए हैं और इजरायल-हमास संघर्ष खत्म करने की दिशा में काम किया है।
ट्रंप क्यों चूके नोबेल शांति पुरस्कार से?
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नामांकन में देरी: नोबेल पुरस्कार के लिए एंट्री 31 जनवरी तक ली जाती है। ट्रंप ने 19 जनवरी को राष्ट्रपति पद संभाला, लेकिन उनके युद्ध रोकने के दावे उसके बाद के हैं, इसलिए इस साल उनके नाम पर विचार नहीं हुआ।
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स्थाई शांति नहीं: नोबेल कमेटी उन प्रयासों को मान्यता देती है जो लंबे समय तक शांति बनाए रखें। ट्रंप की कोशिशों को शॉर्ट टर्म और राजनीतिक माना गया।
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पुराने फैसले उनके खिलाफ गए: ट्रंप के पिछले कार्यकाल में पेरिस जलवायु समझौते और WHO से बाहर निकलना जैसी नीतियों को शांति के खिलाफ माना गया।
क्या ट्रंप आगे जीत सकते हैं?
विशेषज्ञों के मुताबिक, ट्रंप के पास अभी भी मौका है। अगर उनके कूटनीतिक प्रयास लंबे समय तक असर दिखाते हैं, तो उन्हें 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया जा सकता है।
पहले किन अमेरिकी राष्ट्रपतियों को मिला था नोबेल
अब तक 4 अमेरिकी राष्ट्रपति यह पुरस्कार जीत चुके हैं —
थियोडोर रूजवेल्ट, वुडरो विल्सन, जिमी कार्टर और बराक ओबामा।
इस बार का फैसला साफ संकेत देता है कि नोबेल कमेटी सिर्फ दावों पर नहीं, बल्कि ठोस और स्थाई शांति प्रयासों पर ध्यान देती है।
👉 संक्षेप में:
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2025 का नोबेल शांति पुरस्कार मारिया कोरिना मचाडो (वेनेजुएला) को मिला
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ट्रंप नामांकन की समय सीमा और नीतियों के कारण चूके
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2026 में उनके पास दोबारा मौका हो सकता है