Bharat News Network: पंचकूला/चंडीगढ़ : ” रावण जैसे सबसे शक्तिशाली व्यक्ति भी अपने अहंकार से पराजित हो सकते हैं और अच्छाई हमेशा बुराई पर विजय प्राप्त करती है।” ये बात श्री श्री 108 तपोनिष्ठ अग्निहोत्री संपूर्णानंद ब्रह्मचारी जी महाराज ने पंचकूला के इंद्रधनुष सभागार में महिलाओं द्वारा आयोजित राम लीला के दौरान व्यक्त की | उन्होंने कहा कि रावण के अहंकार ने सारे कुल का नाश कर दिया और उसके ही भाई उसके विपरीत सज्जन और प्रभु श्री राम के भक्त विभीषण ने सत्य का साथ देकर बुराई का अंत करने में सहायता की |

इस नेक कार्य के लिए श्री राम के साथ लक्ष्मण, हनुमान, जामवंत, अंगद, नल, नील, जटायु और लाखों वानर सेना ने अपना सहयोग दिया और लंका पर चढ़ाई कर बुराई का अंत किया | ये बात सत्य है कि रावण अहंकारी था | इसके बावजूद वो विद्वान भी था | उसको चारों वेद कंठस्थ याद थे | वो पूजा पाठ और तपस्या आदि में भी आस्था रखता था | पर उसकी इस बुराई ने उसका अंत किया | हम हर वर्ष रावण के पुतले का दहन करते हैं , दरअसल ये रावण का दहन नहीं बल्कि बुराई का दहन है जिसके माध्यम से हम स्मरण रख सकें कि हमारे को घमंड दूर दूर तक न हो अहंकार हम से कोसों दूर रहे और हम सत्य के मार्ग पर चलते रहें |
दसवें दिन पर संस्था की संस्थापक एकता नागपाल और अध्यक्ष अरुण सूद ने बताया कि इस दिन मेघनाद वध, अहिरावण द्वारा राम लक्ष्मण को पाताल ले जाना, अहिरावण वध, रावण वध और राम जी का राजतिलक आज की राम लीला की झलकियों का प्रमुख बिंदु हैं | आज श्री श्री 108 तपोनिष्ठ अग्निहोत्री संपूर्णानंद ब्रह्मचारी जी महाराज गणमान्य व्यक्तियों ने दीप प्रज्वलित कर राम लीला का उद्घाटन किया | अंत में सभी महिला कलाकारों आदि को पुरस्कृत किया गया |
इस अवसर पर अरुण सूद ने कहा कि मनुष्य का जीवन नश्वर है | उसको एक न एक दिन तो जाना ही है | किसी को आगे तो किसी को पीछे | किसी को आज और किसी को कल | सिखों के प्रथम गुरु साहिबान ने भी अपनी बानी में साफ़ किया है कि “राम गयो रावण गयो, ताको बहु परिवार,कह नानक थिर कछु नहीं, स्वप्नेहु ज्यों संसार | अर्थात राम भी चले गए और रावण भी चला गया, और उन दोनों के बड़े परिवार भी चले गए। गुरु नानक देव जी कहते हैं कि इस दुनिया में कुछ भी स्थायी नहीं है, यह तो एक सपने की तरह है।” इसलिए हमें अपने भीतर अहंकार और क्रोध को पनपने नहीं देना चाहिए | जब भी हम यहाँ से जाएँ अच्छे कर्मों के लिए हमें स्मरण किया जाये | आज कोई भी व्यक्ति अपने बच्चों का नाम रावण नहीं रखते बल्कि राम या भगवान् के नाम पर रखते हैं | हम चाहते हैं कि हमारी संतान प्रभु श्री राम जैसी बनी | इसके लिए हम सभी को अपने बच्चों के बीच अच्छे संस्कार देने पड़ेंगे और वो तभी होगा जब उनको इस प्रकार की रामलीलाओं का मंचन, विभिन्न धार्मिक आयोजनों पर अपने साथ ले जाया जाए ताकि देख कर वो भी उस जैसा बनना शुरू करें |
इस मौके पर अरुण सूद ने कहा कि प्रभु श्री राम के अनन्य भक्त होंगे पर हनुमान जैसा परम भक्त कोई नहीं | उन्होंने तो पल पल भगवान् श्री राम के बिगड़े कार्यों को चुटकी में करके उनको हल किया और उनका भाव हमेशा यही रहता था मानों प्रभु श्री राम अपने आप ही सभी कुछ कर रहे हैं | उन्होंने कहा कि वो ततो बीएस एक माध्यम हैं प्रभु श्री राम के बिना कुछ भी संभव नहीं | एक बार राम जी ने हनुमान से पुछा कि हे हनुमान “राम ने हनुमान से पूछा, ‘तुम मुझे कैसे देखते हो?’ हनुमान कहते हैं, ‘जब मैं शरीर के साथ पहचान करता हूं, तो मैं पूरी तरह से आपकी सेवा करता हूं, जब मैं आत्मा के साथ पहचान करता हूं, तो आप…” शरीर से वह प्रभु की सेवा करते हैं, जबकि आत्मा से वह स्वयं को प्रभु से एक मानते हैं।
इस मौके पर उमेश घई ने 10 दिनों तक लगातार मंचित होने वाली महिलाओं द्वारा राम लीला के सफल मंचन पर बधाई देते हुए कहा कि जड़ों से जुडो नाम की संस्था के साथ जुडी सभी महिलाओं को इसके सफल मंचन पर बहुत बहुत बधाई और साधुवाद | ये प्रभु श्री राम ही हैं जिनके फलस्वरूप ये सब संभव हो पाया |