पीएचडीसीसीआई ने एमएसएमई प्रदर्शन बढ़ाने को किया रैंप पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

उद्योग विभाग ने उद्यमियों को दी एमएसएमई ओडीआर पर जानकारी

चंडीगढ़। पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के क्षेत्रीय स्टार्टअप और उद्यमिता मंच द्वारा उद्योग विभाग, चंडीगढ़ प्रशासन के सहयोग से रेजिंग एंड एक्सेलरेटिंग एमएसएमई परफॉरमेंस (रैंप) प्रोग्राम के अंतर्गत एक जागरूकता सत्र का आयोजन किया।

यह पहल भारत सरकार के प्रमुख रैंप कार्यक्रम के माध्यम से एमएसएमई को मज़बूत करने के पीएचडीसीसीआई के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य निर्यात, अनुपालन, नवीकरणीय ऊर्जा, वित्तपोषण और उद्योग 4.0 को अपनाने पर ध्यान केंद्रित करके प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना है।

पीएचडीसीसीआई स्टार्टअप एवं उद्यमिता मंच के चेयर मनीष वर्मा ने कहा कि चैंबर लगातार एमएसएमई को विकास के प्रेरक के रूप में नवाचार, डिजिटलीकरण और ज्ञान-साझाकरण को अपनाने में मदद करने के लिए मंच तैयार कर रहा है। चैंबर की सीनियर क्षेत्रीय निदेशक सुश्री भारती सूद ने एमएसएमई को वित्त तक पहुंच, बाज़ारों की खोज और नीतिगत समर्थन से लाभान्वित करने में पीएचडीसीसीआई की भूमिका को रेखांकित किया और इस बात की पुष्टि की कि रैंप पहल के तहत सरकार, उद्योग और उद्यमियों के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करता रहेगा।

सत्र के दौरान इशिका ओवरसीज के उपाध्यक्ष सचिन सक्सेना ने वैश्विक सर्टीफिकेशन के बारे में बात की। चंडीगढ़ प्रशासन के उद्योग विभाग की जसपिंदर कौर ने अक्टूबर 2025 से प्रभावी नए एमएसएमई ओडीआर (ऑनलाइन विवाद समाधान) प्लेटफ़ॉर्म के उपयोग के बारे में बताया। डायवर्सिटी ऐस की सह-संस्थापक सुश्री दीपाली गुलाटी ने नवीकरणीय ऊर्जा और सर्कुलर अर्थव्यवस्था प्रथाओं को अपनाने पर ज़ोर दिया। भारतीय स्टेट बैंक के एजीएम विवेक कुमार और एजीएम (एससीएफयू) रूपक कुमार राजेश ने एमएसएमई के लिए विस्तृत ऋण योजनाओं पर चर्चा की और एसएमएल इसुजु के महाप्रबंधक रमनीश गुप्ता ने बताया कि कैसे स्वचालन, आईओटी और लीन मैन्युफैक्चरिंग एमएसएमई को अधिक कुशल और लचीले उद्यमों में बदल सकते हैं। सत्र का समापन पर पीएचडीसीसीआई की क्षेत्रीय एमएसएमई समिति के संयोजक एडवोकेट लोकेश जैन ने आए हुए अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

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