पारस अस्पताल ने माइक्रा पेसमेकर लगाकर कैंसर पीड़ित बुजुर्ग को दिया जीवनदान

पंचकूला। पेसमेकर एक छोटा इलैक्ट्रोनिक डिवाइस होता है जो एरिथिमिया व अनियमित दिल की धड़कन को सामान्य बनाए रखने के लिए शरीर के हिस्से मे इंप्लाट किया जाता है। पारस हेल्थ ने हाल ही मे कैंसर पीड़ित एक बुजर्ग को सामान्य पेसमेकर की बजाए जांघ के रास्ते बिना दाग वाला माइक्रा वीआर2 पेसमेकर लगाकर नया जीवनदान दिया है।

डॉ. नवीन अग्रवाल, डायरेक्टर, कार्डियोलॉजी इंटरवेंशनल ने बताया कि गले के कैंसर से पीड़ित रोगी की कई बार रेडिएशन थेरेपी होने के कारण सीने पर गहरे निशान थे और वोकल कॉर्ड पैरालाइज से जूझ रहा था। खाने के लिए फीडिंग ट्यूब पर निर्भर थे। बार-बार होने वाले इंफेक्शन और बेहोशी की घटनाओं से और तबीयत बिगड़ चुकी थी।

जांच करवाने पर ज्ञात हुआ कि उन्हें कंप्लीट हार्ट ब्लॉक है। डॉ. नवीन अग्रवाल ने आगे बताया क उम्र का तकाज़़ा , कमजोरी और सीने पर बने गहरे निशानों की वजह से मरीज को सामान्य पेसमेकर नहीं लगाया जा सकता था। मरीज की हिस्ट्री देखते हुए सामान्य पेसमेकर लगाना जोखिम भरा था। इसलिए माइक्रा वीआर2 एक सुरक्षित और असरदार विकल्प बचा था।

उन्होने बताया कि इस तकनीक से कोई निशान भी नहीं पड़ता, सीने पर बने पॉकेट्स से इंफेक्शन का खतरा नहीं होता और रिकवरी भी जल्दी होती है। पेसमेकर लगाने के बाद से मरीज को बेहोशी की कोई समस्या से निजात मिल गई है। बता दें कि माइक्रा वीआर2 पेसमेकर एक लीडलेस हार्ट पेसिंग टेक्नोलॉजी है। इसमें सामान्य पेसमेकर की तरह तारों और सीने पर कट की जरूरत नहीं पड़ती। इंफेक्शन का खतरा कम होता है।

इसका नया डिलीवरी सिस्टम कैथेटर टिप पर 66 प्रतिशत तक प्रेशर कम करता है और छेद (परफोरेशन) का अनुमानित खतरा 28.5 प्रतिशत तक घटाता है और इम्प्लांट प्रक्रिया उतनी ही सरल रहती है।उधर फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. पंकज मित्तल ने बताया कि पारस हेल्थ मे हाई-रिस्क मरीजों का इलाज माइक्रा वीआर2 जैसी नई तकनीकों के साथ करना संभव है।

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