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बीटूमिन की सप्लाई 60% घटी: कीमतें पचहत्तर फ़ीसदी बढ़ी, ठेकेदारों ने किया काम बंद: पीडब्ल्यूडी के 2000 करोड़ के कामों के सड़क निर्माण कार्य अटके
सरकार इम्पोर्टेड बिटूमीन न लगाने देने पर भड़के ठेकेदार , काम बंद करने पर विवश सरकार दे 2000 करोड़ का मुआवजा तभी काम संभव – ऑल हरियाणा पीडब्ल्यूडी कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन
सरकार ने प्राइवेट बिटूमीन पर पिछले छह महीने से लगाई रोक; उधर सरकार की रिफाइनरी में बिटूमीन है ही नहीं
युद्ध का असर: डामर की कमी से हरियाणा में 2000 करोड़ के सड़क प्रोजेक्ट ठप
एलडीओ की क़ीमत हुई 125 रुपये लीटर हुई
बढ़े दाम देने को सरकार तैयार नहीं, मजबूरन ठेकेदारों को काम करना पड़ेगा बंद
चंडीगढ़:
ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध का असर अब भारत के विकास कार्यों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में तेजी और सप्लाई में भारी कमी के चलते हरियाणा में सड़क निर्माण कार्य बुरी तरह प्रभावित हो गए हैं।
पीडब्ल्यूडी ठेकेदार असिसोसियेशन के चेयरमैन के अनुसार, क्रूड ऑयल की सप्लाई घटने से सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले बिटुमन (डामर) की उपलब्धता करीब 60 फीसदी तक कम हो गई है। इसका सीधा असर हरियाणा के लगभग 2000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स पर पड़ा है, जिनमें कई काम या तो बंद हो गए हैं या बेहद धीमी गति से चल रहे हैं।
ऑल हरियाणा पीडब्ल्यूडी कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक जैन का कहना है कि यदि यही हालात बने रहे तो निर्माण कार्य पूरी तरह ठप हो सकते हैं और प्रोजेक्ट की लागत में भारी बढ़ोतरी होगी।
युद्ध के चलते भारत में आने वाले क्रूड ऑयल की सप्लाई लगभग आधी रह गई है। इसके कारण डामर, लिक्विड डीजल ऑयल (एलडीओ) और प्लास्टिक से जुड़े निर्माण सामग्री के दाम डेढ़ गुना तक बढ़ गए हैं। अकेले हरियाणा में सड़क निर्माण से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
एसोसिएशन के अध्यक्ष के अनुसार, एक माह पहले डामर की कीमत 45 हजार रुपये प्रति टन थी, जो अब बढ़कर 65 हजार रुपये प्रति टन हो गई है और आने वाले दिनों में यह 85 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच सकती है। हर महीने 25-30 हजार टन डामर की जरूरत के मुकाबले फिलहाल केवल 8-10 हजार टन की ही सप्लाई हो पा रही है।
इसी तरह लिक्विड डीजल ऑयल (एलडीओ) की मांग 30 लाख लीटर के मुकाबले केवल 8 लाख लीटर ही उपलब्ध हो रहा है, जबकि इसके दाम भी 60 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच चुके हैं।
मशीनें थमीं, लेबर खाली
डामर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बाद ठेकेदार काम करने से पीछे हट रहे हैं, क्योंकि महंगे रेट पर सामग्री खरीदने से उनकी लागत बढ़ रही है। कई परियोजनाओं में मशीनें साइट पर खड़ी हैं और मजदूर खाली बैठे हैं। ठेकेदार नए ऑर्डर देने से बच रहे हैं, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं।
निर्माण कंपनियों का कहना है कि फिलहाल युद्ध के कारण संकट