पीएचडीसीसीआई इन्स-आउट में आर्किटेक्चर को मिनिमलिज़्म से मैक्सिमलिज़्म पर किया मंथन 

पीएचडीसीसीआई इन्स-आउट में आर्किटेक्चर को मिनिमलिज़्म से मैक्सिमलिज़्म पर किया मंथन

देश भर के जाने-माने आर्किटेक्ट, डिज़ाइनर और प्रोफेशनल आर्किटेक्चर में उभरते ट्रेंड और चुनौतियों पर की चर्चा

चंडीगढ़, 25 सितंबर। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा आयोजित किए जा रहे चार दिवसीय इन्स-आउट प्रदर्शनी की शुरूआत शुक्रवार को सेमिनार के माध्यम से हुई। इसमें देश भर के जाने-माने आर्किटेक्ट, डिज़ाइनर और प्रोफेशनल आर्किटेक्चर और डिज़ाइन सेक्टर में उभरते ट्रेंड, टेक्नोलॉजी और चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए एक साथ आए।

कार्यशाला का थीम ‘मिनिमलिज़्म से मैक्सिमलिज़्म’ और आगे क्या था, जिसमें आर्किटेक्ट और इंडस्ट्री एक्सपर्ट ने इस बात पर चर्चा की कि बदलती जीवनशैली, टेक्नोलॉजी, सस्टेनेबिलिटी और उपभोक्ताओं की बदलती उम्मीदें आर्किटेक्चर के भविष्य को कैसे प्रभावित कर रही हैं।

पीएचडीसीसीआई चंडीगढ़ चेप्टर के को चेयर सुव्रत खन्ना ने अपने स्वागत भाषण में चंडीगढ़ के एक आर्किटेक्चरल हब और आर्किटेक्चरल एजुकेशन और डिज़ाइन के एक महत्वपूर्ण सेंटर के तौर पर महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि शहर की खास प्लानिंग, आज के आर्किटेक्चर और इसके भविष्य की दिशा पर चर्चा के लिए एक सही प्लेटफॉर्म देता है। कॉन्फ्रेंस में इस प्रोफेशन के सामने आने वाली नई चुनौतियों और नए और टिकाऊ समाधानों की ज़रूरत पर भी बात की गई।

पीएचडीसीसीआई के डिप्टी सेक्रेटरी जनरल नवीन सेठ ने पिछले 12 सालों में संस्थान के सफर और गतिविधियों पर पर रोशनी डाली। इस अवसर पर एथोस, बेंगलुरु की संस्थापक आर्किटेक्ट गीता बालकृष्णन ने समाज में आर्किटेक्चर की बड़ी भूमिका के बारे में बात की। उन्होंने ऐसे बने हुए माहौल बनाने के महत्व पर ज़ोर दिया जो सबको साथ लेकर चलने वाले हों और लोगों की ज़रूरतों के हिसाब से हों। उन्होंने कंस्ट्रक्शन सेक्टर से जुड़े वर्कर्स और लेबरर्स की चिंताओं पर भी रोशनी डाली, और इस बात पर ज़ोर दिया कि आर्किटेक्चर के भविष्य पर चर्चा में वर्कफोर्स की गरिमा, सुरक्षा और सिक्योरिटी पर भी ध्यान देना चाहिए।

एआर. फोल्ड्स डिज़ाइन स्टूडियो के प्रिंसिपल आर्किटेक्ट, कृष्ण मूर्ति ने आजकल के आर्किटेक्चर के बदलते नेचर और प्रोफेशन में डिजिटल डिज़ाइन, कम्प्यूटेशनल टूल्स और डिजिटल फैब्रिकेशन की बढ़ती अहमियत के बारे में बात की।

उन्होंने कहा कि आर्किटेक्चर सेक्टर को नई डिजिटल टेक्नोलॉजी को और ज़्यादा एक्टिवली अपनाने की ज़रूरत है, क्योंकि कई प्रोफेशनल्स अभी भी डिजिटल डिज़ाइन और फैब्रिकेशन से मिलने वाले मौकों को पूरी तरह से नहीं अपना रहे हैं। सत्र का संचालन अरविंद विवेक एंड एसोसिएट्स, नई दिल्ली के प्रिंसिपल आर्किटेक्ट, एआर. विवेक गुप्ता ने किया। पैनल में एआर. बीजू कुरियाकोस, आर्किटेक्चर क्रश्वष्ठ, चेन्नई, और एआर. सारिका शेट्टी, पार्टनर, स्छ्व्य आर्किटेक्ट्स, मुंबई शामिल थे।

पैनलिस्ट्स ने मिनिमलिस्ट डिज़ाइन अप्रोच से मैक्सिमलिज़्म की ओर बदलाव पर बात की और चर्चा की कि आर्किटेक्चर और इंटीरियर डिज़ाइन में अगला फेज़ क्या हो सकता है। उन्होंने तेज़ी से बदलती सोशल और टेक्नोलॉजिकल ज़रूरतों को पूरा करते हुए क्रिएटिविटी, फंक्शनैलिटी और सस्टेनेबिलिटी को मिलाने के तरीके खोजे।

दूसरा सेशन ‘पैरामीट्रिक आर्किटेक्चर’ पर फोकस था, जिसमें आजकल के आर्किटेक्चरल प्रैक्टिस में कम्प्यूटेशनल टूल्स और डिजिटल टेक्नोलॉजी के बढ़ते असर पर रोशनी डाली गई। इस सत्र में आर्किटेक्ट मनमोहन खन्ना समेत कई विशेषज्ञों ने अपने विचार व्यक्त किए

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