लोक संवर्धन पर्व के चौथे दिन पांडवास की लोक-फ्यूजन प्रस्तुति ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

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– रोहित चौहान, माया उपाध्याय और पांडवास ने उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक विरासत का उत्सव मनाते हुए शानदार प्रस्तुतियों से आगंतुकों का मन मोह लिया।
– आगंतुकों ने पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पादों, क्षेत्रीय व्यंजनों का आनंद लिया तथा देशभर से आए कारीगरों के साथ संवाद किया।
– 15 जुलाई को भव्य समापन समारोह में प्रसिद्ध पंजाबी गायक परमिश वर्मा की लाइव प्रस्तुति होगी।

देहरादून, 14 जुलाई 2026: भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा उत्तराखण्ड सरकार के उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विकास निगम के सहयोग से आयोजित छठे लोक संवर्धन पर्व के चौथे दिन परेड ग्राउंड, देहरादून उत्तराखण्ड की समृद्ध संगीत परंपराओं के जीवंत उत्सव में परिवर्तित हो गया, जहाँ राज्य के प्रतिष्ठित लोक कलाकारों की मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में आगंतुक एकत्रित हुए। महोत्सव में दिनभर आगंतुकों ने पारंपरिक शिल्प, क्षेत्रीय व्यंजन तथा सांस्कृतिक गतिविधियों का आनंद लिया।

दिनभर आगंतुकों ने प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया, जहाँ देशभर के पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा वस्त्र, विरासत शिल्प तथा क्षेत्रीय उत्पादों का व्यापक संग्रह प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी ने आगंतुकों को कारीगरों एवं उद्यमियों से सीधे संवाद करने तथा भारत की विविध शिल्प परंपराओं को निकट से जानने का अवसर भी प्रदान किया।

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सांस्कृतिक संध्या का शुभारम्भ उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध लोक गायक रोहित चौहान की ऊर्जावान प्रस्तुति से हुआ। उन्होंने नांद्रे, धन सिंह की गाड़ी तथा रूपसा रामोटी सहित लोकप्रिय गढ़वाली एवं कुमाऊँनी गीत प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुति के साथ उपस्थित दर्शकों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक परंपराओं का उत्सव मनाया।

इसके पश्चात प्रसिद्ध लोक गायिका एवं संगीतकार माया उपाध्याय ने क्रीम पौड़ारा, चाहा को होटल तथा आँख्यों में सुरमा जैसे लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति देकर उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक विरासत की आत्मा को जीवंत कर दिया। उनकी मधुर प्रस्तुतियों को संगीत प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक सराहा।

सांस्कृतिक संध्या का मुख्य आकर्षण उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध लोक-फ्यूजन बैंड पांडवास की प्रस्तुति रही। पारंपरिक लोक संगीत और समकालीन संगीत संयोजन के अनूठे मेल के साथ बैंड ने राधा, धुन्याल तथा गणपति देवा सहित अपनी अनेक लोकप्रिय रचनाओं की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। उनकी ऊर्जावान प्रस्तुति ने उत्तराखण्ड की लोककथाओं, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान का प्रभावशाली उत्सव प्रस्तुत किया, जिसे दर्शकों ने जोरदार तालियों के साथ सराहा।

इस अवसर पर अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के एक प्रतिनिधि ने कहा कि लोक संवर्धन पर्व न केवल कारीगरों को व्यापार विकास और बाज़ार तक पहुँच के लिए राष्ट्रीय मंच उपलब्ध करा रहा है, बल्कि भारत की असाधारण सांस्कृतिक विविधता का भी उत्सव मना रहा है। उन्होंने कहा कि दिनभर की प्रस्तुतियों ने उत्तराखण्ड की समृद्ध संगीत विरासत को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया, जिससे यह महोत्सव पारंपरिक शिल्प, संस्कृति और समुदाय का एक अनूठा संगम बन गया।

आगंतुकों ने भाग लेने वाले कारीगरों एवं उद्यमियों के साथ संवाद करते हुए हथकरघा वस्त्रों, काष्ठ शिल्प, पीतल शिल्प, बाँस उत्पादों, टेराकोटा, अजरख प्रिंट तथा पारंपरिक आभूषणों सहित विभिन्न हस्तनिर्मित उत्पादों का अवलोकन एवं खरीदारी की।

लोक संवर्धन पर्व 15 जुलाई 2026 तक प्रतिदिन प्रातः 11:30 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक परेड ग्राउंड, देहरादून में आम जनता के लिए निःशुल्क खुला रहेगा। 15 जुलाई 2026 को होने वाले भव्य समापन समारोह में प्रसिद्ध पंजाबी गायक परमिश वर्मा की लाइव प्रस्तुति होगी, जिसके साथ भारत की समृद्ध कला, शिल्प, व्यंजन और सांस्कृतिक परंपराओं के इस पाँच दिवसीय उत्सव का समापन होगा।

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