72 वर्षीय अशोक घई ने अपनी 3 पुस्तकों को पाठकों को किया समर्पित

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चंडीगढ़:- लेखक अशोक घई ने अपनी 3 किताबों – ‘’भाव-विविध”, “मौज ए एहसास” और “मन परचाऊणीयां” का अनावरण शुक्रवार को सेक्टर 18 स्थित टैगोर थिएटर में किया। अशोक घई की यह तीनों पहली रचना है, जिसे लांच कर वह काफी उत्साहित है और इसी प्रेरणा से ओतप्रोत वे अब आगे भी पुस्तक लेखन के लिये तैयार है। पुस्तक का विमोचन हरियाणा साहित्य एवं सांस्कृतिक अकादमी के कार्यकारी अध्यक्ष और हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विद्यालय के पूर्व कुलपति डॉक्टर कुलदीप अग्निहोत्री ने किया। इस अवसर पर सेना मैडल, विशिष्ट सेवा मैडल से सम्मानित रिटायर्ड ब्रिगेडियर सुभाष चंद्र विशेष अतिथि थे।

पेशे से एक ग्रेजुएट इंजीनियर की यह पुस्तकें इस उम्र में राईटिंग चैलेंज का हिस्सा है जिसे उन्होंनें अपनी कई वर्षों की अथक मेहनत से कलमबद्ध किया है।

5 टाइटल- स्वाभाविक, कुछ यादें कुछ अनुभव, भाव प्रबंधन, राष्ट्र भाव और उत्साह और उल्लास (मोटिवेशनल शायरी) से संग्रहित किताब “भाव विविध” दोहे, शेर और नेशनल पोएट्री का समावेश देखने और पढ़ने को मिलेगा। तो पुस्तक “मौज ए अहसास” पाठकों को शायरी पढ़ने को मिलेगी। इसी प्रकार तीसरी पुस्तक “मन परचाऊणीयां”-ग़ज़ल-पोएट्री पढ़ने को मिलेगी।

पत्रकारों से बात करते हुये लेखक अशोक घई ने बताया कि इन किताबों में हिन्दी कविताओं के साथ साथ पंजाबी कविताऐं और इंसीपिरेशनल (प्रेरणादायी) कोट्स (कथन) द्वारा पाठकों को अपने अनुभव बताने का प्रयास किया है। अशोक घई ने बताया कि निष्ठा, एकाग्रता, कर्मठ शीलता और जज़्बात उनके स्वभाव के प्रमुख हिस्सा रहे हैं।उन्होंने कहा कि कई रूप में मैं दुनिया के सामने प्रस्तुत हुआ और हां, पूरी निपुणता और निष्ठा से हर प्रस्तुति का सफलतापूर्वक प्रतिष्ठित निर्वाह किया। भले ही वो व्यवसायिक हो, शिष्य या शिक्षक के रूप में हो या फिर कोई समाज सेवी संस्थान का प्रतिनिधित्व हो। मगर हर मंज़र उनके लिए तभी तक मान्य था जब तक निष्ठा और निपुणता मान्य रही। निपुणता जब खलने लगी तो निष्ठा टलने लगी।

अशोक घई ने पुस्तकों के बारे में संक्षिप्त जानकारी देते हुए बताया कि ‘मौज ए एहसास’ इन्सान के अपेक्षित व्यवहार वफ़ा, फितरत, खूबसूरती, दोस्ती, की मानसिक प्रक्रियाओं का शायराना बयान है। ‘भाव विविध’ वास्तविक स्वभाव, उत्पन्न परिस्थितियों में भाव, अनुभव और कुछ घटित घटनाओं और राष्ट् भाव का काव्यात्मक उल्लेख है। ‘मन परचाऊणीयां’ दिल की दुखती रगों से निकलते दर्द का गुबार पंजाबी भाषा में पेश किया है। पंजाबी न पढ़ सकने वालौं की सुविधा के लिए यह हिन्दी लिपी में भी लिखा है।

उन्होंने आगे बताया कि व्यवसायिक दृष्टि से एक इन्जिनियर हूं और जीवन काल में एक सम्मानित अध्यापक की भी भूमिका निभाई है। एक प्रतिष्ठित इन्जिनियरिंग कालेज-पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से डिग्री प्राप्त करने के बाद अपने स्वभाव के अनुरूप चल पड़े ज़िन्दगी के सफर पे। उनकी स्कुली शिक्षा भी एक सम्मानित स्कूल- डी ए वी स्कूल सेक्टर 8 से ही हुई है। जहां उन्हें एक सफल वक्ता के रूप में उभरने का अवसर प्राप्त हुआ। जो उन्होंने बखूबी अर्जित किया। 12 वर्ष की आयु में पहली बार उन्होंने एक भाषण प्रतियोगिता में भाग लिया और पारितोषित भी हुए। अनेक प्रतियोगिताओं में स्कुल का प्रतिनिधित्व किया और सफलता पूर्वक अनेकों बार स्कुल का प्रभुत्व उजागर करने में सक्षम साबित हुआ। स्कुल ने भी उन्हें एक सर्वश्रेष्ठ वक्ता के रूप में सम्मानित किया और यही काल था जब उन्हें अपने में एक आत्मविश्वास की अनुभूति हुई, मंच पर परस्त8 की ओर अपने में इस योग्यता का एहसास हुआ। इन्हीं प्रस्तुतियों और अनेकों वक्तव्य सुनकर और प्रस्तुत करके उन्हें शेरो शायरी व दोहों की विविध प्रस्तुति और रचनाओं का भी अनुभव हुआ।

इंजीनियरिंग कॉलेज में भी अपनी व्यवसायिक शिक्षा के साथ साथ उन्हें शौंक रहा, दिलकशी भी का। अपने जज़्बाती ख्वाबों को उजागर करते हुए, जाने अनजाने मे कुछ अशियार कवितायें और कुछ नज़्मों की शक्ल में अपने ख्याल लिखे। उस समय शायद यह कतरा कतरा बिखरा था, पर आज उनकी यह पेशकश उन्ही दिनों की शुरुआत का नतीजा है। जिसे वो आज सबके सामने पेश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि लेखन अब शौक बन गया है। इन पुस्तकों को पाठकों से मिले भरपूर सहयोग से उनमें एक नई उर्जा का संचार हुआ है। इससे उन्हें भविष्य में भी लिखते रहने की प्ररेणा मिली है। अब लेखन का कार्य आगे भी जारी रहेगा। अपनी नई संरचना जल्द ही वो पाठकों के समक्ष पेश करेंगे।

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