पुस्तक में प्रेम, रिश्तों, बिछड़ने, संघर्ष से उबरने और दोबारा शुरुआत करने के साहस को सामने रखा गया है
चंडीगढ़, 11 सितंबर 2026: लेखिका दीपिका गोरजी की पहली संस्मरण पुस्तक ‘ए गर्ल्स जर्नी’ का शुक्रवार को चंडीगढ़ के सेक्टर 31 स्थित सीआईआई में आयोजित ‘अनस्पोकन’ कार्यक्रम में औपचारिक रूप से विमोचन किया गया। यह कार्यक्रम कांफ्रेंडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) के इंडियन वूमेन नेटवर्क (आईडब्ल्यूएन) की पहल ‘अनस्पोकन’ के तहत नोवेल बंच के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सीआईआई आईडब्ल्यूएन चेयरपर्सन साक्षी कत्याल और को चेयरपर्सन डॉ लिपि पाठक के साथ नॉवेल बंच की को फाउंडर सुगुना जैन भी उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम के दौरान गोरजी ने मीडिया से बातचीत भी की और अपनी लेखन यात्रा, संस्मरण लिखने के लिए प्रेरित करने वाले अनुभवों तथा जीवन के किसी भी पड़ाव पर अपनी आवाज को पहचानने और उसे सामने रखने के महत्व पर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि यह पुस्तक उन्होंने अपने माता-पिता को समर्पित की है। गोरजी ने कहा कि वह अपने स्वर्गीय पिता के बेहद करीब थीं और उनकी यादों तथा उनसे जुड़े अनुभवों को भी उन्होंने अपनी पुस्तक का हिस्सा बनाया है।
गोरजी ने 53 वर्ष की उम्र में लेखन की शुरुआत की। उन्होंने अपनी पहली पुस्तक में निजी अनुभवों, रिश्तों, प्रेम, बिछड़ने, निराशाओं और आत्मचिंतन को पिरोया है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी ऑनलाइन से क्रिएटिव राइटिंग में प्राप्त प्रमाणपत्र ने भी एक लेखिका के रूप में उनके विकास को दिशा दी।
दीपिका गोरजी ने कहा, “इस पुस्तक को लिखना मेरे लिए बेहद निजी अनुभव रहा है। इसने मुझे उन लोगों, रिश्तों और अनुभवों को फिर से देखने का अवसर दिया, जिन्होंने मुझे आकार दिया और इसी प्रक्रिया में मुझे अपनी आवाज को पहचानने का मौका मिला। हम अक्सर मान लेते हैं कि हमारे जीवन के सबसे महत्वपूर्ण अध्याय पहले ही लिखे जा चुके हैं , लेकिन मेरी यात्रा ने मुझे सिखाया है कि किसी भी उम्र में एक नया अध्याय शुरू किया जा सकता है और कई बार सबसे महत्वपूर्ण कहानियां अभी कही जानी बाकी होती हैं।”
‘अनस्पोकन’ के बारे में बात करते हुए सीआईआई आईडब्ल्यूएन की चेयरपर्सन साक्षी कत्याल ने कहा, “‘अनस्पोकन’ ऐसी जगह बनाने का प्रयास था, जहां महिलाओं के अनुभवों और विचारों को खुलकर सामने रखा जा सके।” सीआईआई आईडब्ल्यूएन की को-चेयरपर्सन डॉ. लिपि पाठक ने कहा, “‘अनस्पोकन’ ने पहचान, रिश्तों, स्वास्थ्य और संघर्ष से उबरने जैसे विषयों पर ईमानदार बातचीत के लिए एक मंच तैयार किया।” नोवेल बंच की को-फाउंडर सगुना जैन ने कहा, “‘ए गर्ल्स जर्नी’ बेहद व्यक्तिगत पुस्तक है, लेकिन इसमें व्यक्त भावनाएं सार्वभौमिक हैं और कई पाठकों से जुड़ेंगी।”
कार्यक्रम के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल ‘टाइनी’ ढिल्लों, विवेक अत्रे, सगुना जैन और हरदीप चांदपुरी ने पुस्तक का औपचारिक विमोचन किया। विमोचन के बाद गोरजी ने सीआईआई आईडब्ल्यूएन की चेयरपर्सन साक्षी कत्याल के साथ बातचीत में हिस्सा लिया और संस्मरण के पीछे के अनुभवों तथा अपने विचारों को साझा किया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विषयों पर बातचीत हुई। ‘इन द ट्वाइलाइट जोन’ सत्र में सुदेती जिंदल, ब्रिगेडियर दलजीत ढिल्लों और आंचल गोयल ने डॉ. लिपि पाठक के साथ बातचीत की। इसमें ऐसे अनुभवों और विचारों पर चर्चा की गई, जो अक्सर पारंपरिक बातचीत का हिस्सा नहीं बन पाते।
‘हार्मोन्स: हिज एंड हर्स’ सत्र में चांदनी लांबा, डॉ. विमल विभाकर और अंजू मेहता ने प्रीतिका गुलाटी के साथ बातचीत की। इसमें हार्मोन्स और रोजमर्रा की जिंदगी पर उनके प्रभाव पर चर्चा की गई।
‘फ्रॉम अनक्लेम्ड टू द अनसीन’ सत्र में वंदना शुक्ला, विवेक अत्रे और सुपर्णा-सरस्वती पुरी ने हिस्सा लिया। इस सत्र में लोगों की मौजूदगी, पहचान और उन कहानियों से जुड़े सवालों पर चर्चा की गई, जिन पर अक्सर ध्यान नहीं जाता।