83 वर्षीय अंगदाता को श्रद्धांजलि: नेत्रदान से दो लोगों को मिला नया जीवन

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पंचकूला, 29 मार्च 2026: अंगदान और विशेष रूप से नेत्रदान के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच पंचकूला से एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है। 83 वर्षीय सत्या रानी के निधन के बाद उनके परिवार ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए पारस हेल्थ पंचकुला में उनकी आँखें दान कीं। यह निर्णय न केवल मानवता की मिसाल है, बल्कि समाज में अंगदान के महत्व को भी मजबूत संदेश देता है।

सत्या रानी पिछले एक महीने से एडवांस स्टेज ओवेरियन कैंसर से जूझ रही थीं, जो पेरिटोनियल मेटास्टेसिस तक फैल चुका था। निधन के बाद अस्पताल ने स्टैंडर्ड मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत आई बैंक टीम के साथ मिलकर समय पर नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की, जिससे कॉर्निया सुरक्षित रखा जा सके और कॉर्नियल अंधता से पीड़ित मरीजों को रोशनी मिल सके।

इस अवसर पर पारस हेल्थ पंचकुला के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. पंकज मित्तल ने कहा, “सत्या रानी के परिवार का यह निर्णय समाज के लिए एक प्रेरणा है। नेत्रदान सबसे सरल लेकिन प्रभावशाली दान में से एक है, जो मृत्यु के बाद भी किसी को जीवन का प्रकाश दे सकता है।”

विशेषज्ञों के अनुसार, एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो लोगों की दृष्टि वापस लाई जा सकती है। भारत में हर वर्ष लगभग 1 लाख कॉर्नियल ट्रांसप्लांट की आवश्यकता होती है, लेकिन दान की संख्या अभी भी काफी कम है। हर साल 25,000 से 30,000 लोग कॉर्नियल अंधता का शिकार होते हैं, जिसे समय पर नेत्रदान से रोका जा सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अंगदान को लेकर समाज में अभी भी जागरूकता की कमी है। कई लोग इसकी प्रक्रिया और महत्व को पूरी तरह नहीं समझते, जिसके कारण दान की दर कम बनी हुई है। नेत्रदान मृत्यु के कुछ घंटों के भीतर ही संभव होता है, इसलिए परिवार की समय पर सहमति और अस्पताल व आई बैंक के बीच तेज़ समन्वय बेहद आवश्यक होता है।

सरकार द्वारा ‘राष्ट्रीय अंधता नियंत्रण कार्यक्रम’ के तहत नेत्रदान को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन इसके सफल होने के लिए समाज की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। जागरूकता अभियान, सामुदायिक सहयोग और सकारात्मक उदाहरण इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

पारस हेल्थ पंचकुला ने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे प्रेरणादायक कदम समाज को यह संदेश देते हैं कि मृत्यु के बाद भी जीवन को रोशनी दी जा सकती है। विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की कि वे आगे आकर अंगदान का संकल्प लें और दूसरों के जीवन में उजाला लाने का माध्यम बनें।

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