अपनी तीन फिल्मों के निर्माण में मेरे अनुभव काफी पीड़ादायक रहे, अब कुछ समय के लिए आराम करना चाहता हूं : विवेक रंजन अग्निहोत्री

रिपोर्ट रोशन लाल शर्मा -

आजाद होकर पहले की तरह रोज गार्डन और राक गार्डन घूमने की इच्छा जताई : अनुभव में पीड़ा, उसके बाद आराम, फिर करेंगे महाभारत थीम पर काम

*”मेरी फिल्मों का विरोध करने वाले ही ये फ़िल्में देखने सबसे पहले पहुंचे” *

चण्डीगढ़ : हाल ही में रिलीज हुई द बंगाल फाइल्स के बहुचर्चित फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने अपनी पिछली तीन फिल्मों के निर्माण के दौरान हुए पीड़ादायक अनुभवों को आज चण्डीगढ़ प्रेस प्रेस क्लब में आयोजित एक पत्रकार वार्ता को पत्रकारों से रू-ब-रू होते हुए सांझा किया। उन्होंने बताया कि मजे की बात ये है कि फाइल्स-त्रयी ताशकंद फाइल्स, कश्मीर फाइल्स और द बंगाल फाइल्स फिल्मों का विरोध करने वाले ही ये फ़िल्में देखने सबसे पहले पहुंचे। उन्होंने कहा कि अब वे कुछ समय तक आराम करना चाहते हैं और इसके बाद वे महाभारत पर आधारित थीम पर काम करेंगे। इस अवसर पर अग्निहोत्री ने बताया कि वे आज अपनी फिल्म द बंगाल फाइल्स की पहली बार ट्राईसिटी चंडीगढ़ में स्क्रीनिंग के लिए आए हैं। पत्रकार वार्ता के दौरान उनके साथ टीम सिने इंडिया से एडवोकेट आरती शर्मा और अनुपिंदर सिंह लाली मुलतानी भी मौजूद रहे। WhatsApp Image 2025 11 05 at 5.00.55 PM 1

अग्निहोत्री ने कहा कि वे भी चाहते हैं कि पहले की तरह चण्डीगढ़ आकर रोज गार्डन-रॉक गार्डन में घूमे लेकिन वाई श्रेणी के सुरक्षा घेरे की वजह से अब वे कैद में हैं। जीवन जेल जैसा बन गया है, लेकिन भीतर का एक्टिविस्ट जीवित है। वह काम करता रहेगा। वे कुछ देर आराम चाहते हैं व उसके बाद फिर से सक्रियता से काम में जुटेंगे।

उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से मानसिक थकान और फतवों के अलावा हमलों की पीड़ा झेल रहे हैं, लेकिन भीतर के एक्टिविस्ट ने उन्हें आराम नहीं करने दिया, नतीजन काफी कुछ सहना पड़ा। तरह-तरह की धमकियां मिली जिससे उनकी  मानसिक शांति भंग हुई। यहां तक कि उनका दायां कंधा भी एक हमले में टूट गया। यानी शारीरिक और मानसिक दोनों तरह का दर्द झेलना पड़ा, परंतु इससे उनका फिल्म बनाने का जुनून कम नहीं हुआ।

इस सबका का असर यह रहा कि यह पीड़ा और विरोध उन पर हावी हो गया और लोगों ने उन्हें अक्सर काले कपड़ों में देखा। आज लंबे अर्से के बाद वे काले कपडे छोड़ सफेद कपड़ों में सबके सामने आए हैं। उन्होंने स्वामी विवेकानंद जी को अपना आदर्श बताया व कहा कि वे श्रीकृष्ण और अष्टावक्र जी की गीता से प्रभावित हैं।

उन्होंने कहा कि जिस श्रेणी की फिल्में वह बनाते हैं, उन पर काफी रिसर्च होती है। हालांकि लव स्टोरी जैसे विषयों पर फिल्में पलक झलकते हुए भी बना सकते हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले वह भी खेल और लव स्टोरी पर आधारित फिल्में बना चुकें हैं। हर विषय पर फिल्म बनाई है, लेकिन अब देश के लिए ही काम करने की इच्छा है।

एक सवाल के उत्तर में उन्होंने कहा कि अगले वर्षों में वह पंजाब के ज्वलंत मुद्दों पर फिल्म बनाने की इच्छा तो रखते हैं। परन्तु अगर कोई रिलीज कराने की गारंटी ले तो, वे  अवश्य बनाएंगे।

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