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भुवनेश्वर, 16 जुलाई। ओडिशा के पुरी में विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथयात्रा शुक्रवार से शुरू होगी। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर आरंभ होने वाली इस नौ दिवसीय यात्रा में भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडीचा मंदिर तक प्रस्थान करेंगे। यह यात्रा 24 जुलाई को बाहुदा यात्रा (वापसी यात्रा) के साथ संपन्न होगी, जबकि 25 जुलाई को तीनों देवों का स्वर्ण आभूषणों से विशेष श्रृंगार ‘सुना वेश’ होगा।
रथयात्रा की सबसे प्रमुख परंपराओं में ‘छेरा पहरा’ शामिल है, जिसमें पुरी के गजपति महाराज सोने की झाड़ू से तीनों रथों के मार्ग की सफाई करते हैं और सुगंधित जल का छिड़काव करते हैं। यह परंपरा समानता और सेवा का संदेश देती है कि भगवान के समक्ष सभी समान हैं। मान्यता है कि इस अवसर पर भगवान स्वयं मंदिर से बाहर निकलकर उन भक्तों को दर्शन देते हैं, जो किसी कारणवश मंदिर के भीतर नहीं जा पाते।
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथ पारंपरिक कारीगरों द्वारा हर वर्ष नए सिरे से तैयार किए जाते हैं। इन विशाल रथों के निर्माण में चार हजार से अधिक लकड़ी के टुकड़ों का उपयोग किया जाता है, लेकिन इनमें लोहे की कील या अन्य धातु का प्रयोग नहीं होता। इस अनूठी परंपरा और धार्मिक आस्था के कारण देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु हर वर्ष पुरी पहुंचते हैं और भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में शामिल होकर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं।

