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मुनि मंदिर में श्री सतगुरु देव श्री श्री 108 श्री मुनि गौरवानंद गिरि जी महाराज की 39वीं पुण्य तिथि पर धार्मिक समारोह विधि विधान के साथ संपंन
साधु, संतों और महात्माओं का मुनि सभा द्वारा भव्य स्वागत
चंडीगढ़ 13 जुलाई 2026: सेक्टर 23 स्थित श्री महावीर मुनि मंदिर (साधू आश्रम)में ब्रह्मलीन श्री सतगुरु देव श्री श्री 108 श्री मुनि गौरवानंद गिरि जी महाराज की 39वीं पुण्य तिथि समारोह के उपलक्ष्य में सैकड़ों साधु संत और महात्माओं का आगमन हुआ। जिनका मुनि सभा के सदस्यगणों ने स्वागत किया और साधु संतो और महात्माओं की सेवा में भी योगदान दिया। इससे पूर्व प्रातः प्रभात फेरी और मंदिर परिसर विधि- विधान के साथ भव्य हवन किया गया। पूर्णाहुति के उपरांत इस धार्मिक समारोह के समापन पर महाआरती की गई।
देश के विभिन्न राज्यों से आये सभी साधु, संत, महात्माओं को सांस्कृतिक सचिव व मुख्य पुजारी पं. दीप भारद्वाज ने तिलक लगा कर अभिनंदन किया। इस दौरान सभा के प्रधान दलीप चन्द गुप्ता, उपप्रधान ओ.पी पाहवा, कार्यालय सचिव नंदलाल शर्मा तथा ऑडिटर नरेश महाजन तथा सदस्य ओपी गुप्ता भी उपस्थित थे जिन्होंने साधु, संत और महात्माओं को दक्षिणा, फल, वस्त्र वितरण किए और साधु-संतो व महात्माओं को विशाल भंडारे का प्रसाद वितरण किया। बाद में आम जनता को भंडारा परोसा गया।
समारोह में कथा वाचक हरि जी महाराज ने भगवान के मधुर एवं भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। उनके भजनों पर उपस्थित श्रद्धालु भक्ति-रस में सराबोर होकर झूम उठे तथा पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण व्याप्त हो गया।अपने प्रवचन में हरि जी महाराज ने कहा कि श्री हनुमान जी भक्तों के शिरोमणि एवं प्रभु श्रीराम के परम प्रिय सेवक हैं। हनुमान जी की निष्काम सेवा, अटूट श्रद्धा और समर्पण ही भगवान श्रीराम तक पहुँचने का सबसे सरल और श्रेष्ठ मार्ग है।
उन्होंने आगे कहा कि जब तक हृदय में श्री हनुमान जी के प्रति सच्ची भक्ति, विश्वास और सेवा का भाव जागृत नहीं होता, तब तक प्रभु श्रीराम की कृपा प्राप्त करना कठिन है। श्री हनुमान जी केवल बल, बुद्धि और पराक्रम के ही प्रतीक नहीं हैं, बल्कि विनम्रता, सेवा, त्याग और अटूट भक्ति के भी सर्वोच्च आदर्श हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में श्रीराम नाम का निरंतर स्मरण करें, हनुमान चालीसा एवं सुंदरकांड का नियमित पाठ करें तथा धर्म, सत्य और सेवा के मार्ग पर चलकर अपने जीवन को सफल एवं सार्थक बनाएं।
प्रवचन के अंत में श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम और जय बजरंगबली के जयघोष के साथ पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
सभा के प्रधान दलीप चन्द गुप्ता ने इस अवसर पर कहा कि प्रति वर्ष ब्रह्मलीन श्री सतगुरु देव श्री श्री 108 श्री मुनि गौरवानंद गिरि जी महाराज की पुण्य तिथि पर धार्मिक समारोह विधि विधान के साथ मनाया जाता है और यह परंपरा भविष्य में भी यथावत जारी रहेगी।

