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चंडीगढ़ प्रशासक का अफसरों पर तंज: बोले- झूठे दावे और गप्पें बंद करें, 2 करोड़ पौधे लगते तो एक इंच जमीन खाली न होती; पहाड़ आज भी हैं नंगे

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चंडीगढ़ में शुक्रवार को वन महोत्सव समारोह में प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने अफसरों पर जमकर तंज कसे। प्रशासक कटारिया ने कहा- हर साल हमारा विभाग कहता है कि हमने वन महोत्सव में इतने पौधे लगा दिए, एक लाख, दो करोड़। अगर उन सबका कुल हिसाब करें तो जमीन का एक इंच भी खाली नहीं रहेगा।

कटारिया ने दोटूक कहा कि गप्पें और झूठ बंद करो, बढ़ा-चढ़ाकर बोलना हमारी आदत बन गई है। दिल्ली में हम सम्मानित हो गए और पहाड़ नंगे का नंगा ही है। कटारिया जब ये बातें कर रहे थे तो चंडीगढ़ के अफसरों के चेहरे पर शर्मिंदगी साफ झलक रही थी।

सरकारी दावे जोड़ लूं तो एक इंच जमीन खाली नहीं मिलेगी: प्रशासक कटारिया ने सरकारी दावों पर खुलकर सवाल उठाए। पौधारोपण के आंकड़ों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा- अगर हर साल लगाए गए पौधों के सरकारी दावों को जोड़ लिया जाए तो शहर में एक इंच जमीन भी खाली नहीं बचेगी।

झूठ बोलने की आदत पर की खिंचाई: कटारिया ने बढ़ा-चढ़ाकर दावे करने और झूठ बोलने की आदत पर अधिकारियों की खिंचाई की और उन्हें आत्ममंथन करने की नसीहत दी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सामूहिक प्रयासों का ही नतीजा है कि चंडीगढ़ का ग्रीन कवर बढ़कर 51.6 फीसदी पहुंच गया है, जो देश में सबसे अधिक है।

3 साल से पहाड़ खाली, कलेक्टर सम्मानित होकर आ गए: चंडीगढ़ के प्रशासक ने कहा कि केवल पौधे लगाने के दावे करने से काम नहीं चलेगा प्रशासक ने बताया कि पहले भी कई अभियान चलाए गए और कलेक्टर साहब दिल्ली में सम्मानित हुए। लेकिन तीन साल पहाड़ी खाली का खाली। प्रशासक ने कहा कि अगर पेड़ नहीं होंगे तो पानी नहीं होगा और पानी नहीं होगा तो खाने के लिए अनाज भी नहीं मिलेगा।

चंडीगढ़ में 50 साल पुराने पेड़, इन्हें बचाना जरूरी: उन्होंने कहा कि इस लिहाज से चंडीगढ़ भाग्यशाली शहर है, जहां आज भी 50-50 साल पुराने बरगद के पेड़ खड़े हैं। इन पेड़ों को हर हाल में बचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण लगातार बिगड़ रहा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण अमरनाथ गुफा का शिवलिंग है, जो बर्फ से बनता है। पहले श्रद्धालु पैदल चलकर दर्शन करते थे, लेकिन इस बार तीन दिन में ही करीब सात फुट ऊंचा शिवलिंग पिघल गया।

चंडीगढ़ में ट्री मैप बना, 5-10 रुपए में दिए जा रहे पौधे अधिकारियों ने बताया कि चंडीगढ़ में किसी को भी मुफ्त में पौधे नहीं दिए जाते, क्योंकि मुफ्त में मिली चीज की कद्र नहीं होती। इसलिए प्रत्येक पौधे की कीमत पांच से दस रुपए तय किए है। पिछले साल साढ़े पांच लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया था, जबकि साढ़े छह लाख पौधे लगाए गए।

 

उन्होंने बताया कि पिछले साल एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया गया था। शहर का ट्री मैप बनाया गया । उसी आधार पर कमेटी की सिफारिश पर यह तय किया जा रहा है कि चंडीगढ़ के किस क्षेत्र में किस प्रजाति के पौधे लगाए जाएं, ताकि शहर की जरूरत के मुताबिक हरियाली विकसित की जा सके।

 

डंपिंग ग्राउंड में इस तरह की सुविधाएं होगी कमिश्नर कुमार ने बताया कि डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड को नए तरीके से विकसित किया जाएगा। इस स्थल पर माली तैनात किए जाएंगे, जो एक-एक पौधे की देखभाल करेंगे। यहां ट्रीटेड पानी की व्यवस्था भी कर दी गई है। भविष्य में यहां जॉगिंग ट्रैक, जिम, प्ले एरिया और वॉकिंग ट्रैक का निर्माण किया जाएगा। इस क्षेत्र में बांस, बेंजामिना, पीपल, कपूर, पिलखन और फलदार प्रजातियों के करीब 10 हजार पौधे लगाए गए हैं। साथ ही 14 एकड़ क्षेत्र को मियावाकी फॉरेस्ट के रूप में विकसित किया जाएगा।

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