गौड़ीय मठ के पूर्व आचार्य भागवत महाराज का 100 वां जन्मदिन मनाया

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चण्डीगढ़ : श्री चैतन्य गौड़ीय मठ, सेक्टर 20 में पूर्व आचार्य त्रिदंडी स्वामी श्री भक्तिभूषण भागवत महाराज जी का 100वां जन्मदिन बहुत ही हर्षोल्लास उमंग एवं विधिविधानपूर्वक मनाया गया। मठ मंदिर के प्रवक्ता जयप्रकाश गुप्ता ने बताया कि प्रातः काल मंगल आरती के पश्चात संकीर्तन कथा प्रवचन का आयोजन किया गया। भक्तों को संबोधित करते हुए चैतन्य गौडिया मठ के स्वामी सन्यासी त्रिदंडी स्वामी श्री भक्ति प्रकाश सिद्धांती महाराज ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि श्री भागवत महाराज जी अपना पूरा जीवन भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु जी द्वारा प्रदत्त शुद्ध कृष्ण भक्ति का संदेश एवं सनातन धर्म के प्रचार प्रसार के लिए पूरी तरह से समर्पित कर दिया था।WhatsApp Image 2026 03 07 at 18.47.37

12 बरस की अल्पायु में यह आध्यात्मिक विचार से आकर्षित होकर श्री त्रिदंडी स्वामी भक्ति दायित्व माधव गोस्वामी जी महाराज जी के सानिध्य में आकर भक्तिमय जीवन व्यतीत करने लगे थे। वे प्रतिदिन प्रातः काल 3:00 बजे उठकर दोपहर तक तीन लाख हरि नाम का जाप किया करते थे। तत्पश्चात अन्न ग्रहण करते थे। इनका उपदेश था कि 84 लाख योनियों में भटकने के बाद मनुष्य को बड़ी मुश्किल से मनुष्य जन्म मिलता है। यह जीवन भगवान के घर वापस जाने का मुख्यद्वार है।

यदि अब भूल बस हमने यह मौका खो दिया तो फिर 84 लाख योनियों में भटकना पड़ेगा, इसलिए वह दबाव देखकर कहते थे कि अधिक से अधिक अपना जीवन भगवान को समर्पित कर अपना जीवन यापन करना चाहिए। उनका कहना था कि समर्पण का अर्थ जंगलों में जाकर तपस्या करना नहीं है घर गृहस्थी में रहकर ही अपना हरि नाम जाप और संकीर्तन, और भगवान के लिए सेवा के लिए जीवन होना चाहिए। सभी प्रकार के दुखों का  निवारण सिर्फ सिर्फ हरि नाम संकीर्तन द्वारा ही हो सकता है। आज के कार्यक्रम में उन्हें शुद्ध देसी घी के सौ दीपकों द्वारा आरती उतारी गई तथा उन्हें 56 तरह के स्वादिष्ट व्यंजनों का भोग लगाया गया। भक्तों ने अपने महानायक के 100 वर्ष जन्म के उपलक्ष में नृत्य गान संकीर्तन का आनंद लिया। कार्यक्रम के पश्चात सैंकड़ों की संख्या में लोगों ने भगवान को अर्पित स्वादिष्ट महाप्रसाद ग्रहण किया।

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