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मोटापा एक क्रोनिक बीमारी, ओजेम्पिक जैसी नई दवाएं केवल एंडोक्राइनोलॉजिस्ट ही करें प्रेसक्राइब — डॉ. गगन प्रिया

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चंडीगढ़।
देशभर से आए एंडोक्राइनोलॉजिस्ट शनिवार को मोहाली के एक निजी होटल में एकत्रित हुए, जहां एंडोक्राइन सोसाइटी ऑफ इंडिया की राष्ट्रीय अकादमिक पहल “वी केयर 2026” और ओबेसिटी वीक का विधिवत शुभारंभ हुआ। दो दिवसीय इस सम्मेलन में महिलाओं के स्वास्थ्य, हार्मोनल विकारों और देश में तेजी से बढ़ती मोटापे की समस्या पर व्यापक चर्चा की जा रही है।

सम्मेलन में देश के अग्रणी विशेषज्ञों ने महिलाओं के हार्मोनल स्वास्थ्य के विभिन्न चरणों—किशोरावस्था, गर्भावस्था और रजोनिवृत्ति—पर गहन मंथन किया। साथ ही एंडोक्राइन विकारों की समय पर पहचान और उनके प्रभावी प्रबंधन की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

आयोजन की चेयरपर्सन डॉ. सरिता बजाज ने कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य की देखभाल करना महिला स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए जिम्मेदारी के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण अवसर भी है। आयोजन सचिव डॉ. गगन प्रिया ने कहा कि महिलाओं के जीवन में होने वाले हार्मोनल परिवर्तनों को लेकर जागरूकता और वैज्ञानिक समझ बढ़ाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मोटापा एक क्रोनिक बीमारी है और इसके उपचार में उपयोग होने वाली नई दवाएं, जैसे ओजेम्पिक, केवल प्रशिक्षित एंडोक्राइनोलॉजिस्ट की सलाह से ही दी जानी चाहिए।

कार्यक्रम की शुरुआत वैज्ञानिक चेयरपर्सन डॉ. एमी ग्रेवाल के स्वागत भाषण से हुई। इस दौरान डॉ. उषा श्रीराम (चेन्नई) ने मधुमेह से पीड़ित महिलाओं में प्रीकंसेप्शन केयर की कमी पर चिंता जताते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए इस दिशा में तत्काल कदम उठाना जरूरी है।

महिलाओं में बढ़ते मोटापे पर विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि भारत में लगभग हर चार में से एक महिला मोटापे से प्रभावित है, जो अब एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। डॉ. शेहला शेख (मुंबई) ने महिलाओं में मोटापे और Polycystic Ovary Syndrome (PCOS) के बीच संबंध पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. नितिन कपूर (वेल्लोर) ने मोटापे के प्रबंधन से जुड़े नवीनतम दिशानिर्देशों की जानकारी दी।

सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण डॉ. निखिल टंडन, प्रोफेसर एवं डीन, एम्स नई दिल्ली का प्लेनरी सत्र रहा, जिसमें उन्होंने किशोरियों में तेजी से बढ़ते मोटापे के बोझ पर विस्तार से चर्चा की। वहीं डॉ. डोना रायन ने साक्ष्य-आधारित मोटापा प्रबंधन के वर्तमान दृष्टिकोण पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

इसके अलावा डॉ. संजय कालरा (करनाल) ने डॉक्टरों के लिए स्पीकर स्किल्स डेवलपमेंट पर एक इंटरएक्टिव कार्यशाला भी आयोजित की। अकादमिक सत्रों के दौरान किशोरावस्था, मधुमेह, ऑस्टियोपोरोसिस और थायरॉयड विकारों से जुड़े विषयों पर क्विज प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं, जिनमें प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

WE CARE 2026 और Obesity Week के तहत आगामी सत्रों में विशेषज्ञ व्याख्यान, केस स्टडी और शैक्षणिक चर्चाएं आयोजित की जाएंगी, जिनका उद्देश्य विशेष रूप से महिलाओं में हार्मोनल विकारों और मोटापे के प्रति जागरूकता, समय पर निदान और बेहतर उपचार को बढ़ावा देना है।

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