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अफ़सरशाही की सुस्ती ने रोका चंडीगढ़ का पहिया: बजट खर्च करने में प्रशासन ‘फेल’ – पुनीत महाजन चंडीगढ़

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​ चंडीगढ़ के विकास पर अफ़सरशाही का ग्रहण: करोड़ों का बजट खर्च करने में नाकाम रहे विभाग, शहरवासियों के भविष्य पर मंडराया संकट।​
शहर के जाने-माने समाजसेवी और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट (AG कार्यालय) के सेवानिवृत्त सुपरिंटेंडेंट राजबीर सिंह भारतीय ने चंडीगढ़ प्रशासन के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही और फाइलों को लटकाने की पुरानी आदत के कारण चंडीगढ़ के विकास पर ‘ग्रहण’ लग गया है। करोड़ों का बजट उपलब्ध होने के बावजूद विकास कार्यों का जमीन पर न उतरना शहरवासियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

बजट लैप्स होने का खतरा, केंद्र लगा सकता है भारी ‘कट’ राजबीर सिंह ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र से मिले लगभग ₹6,983. 18 करोड़ का बड़ा हिस्सा विभागों की फाइलों में ही दबा रह गया। उन्होंने सचेत किया कि “नियमों के मुताबिक, यदि आवंटित फंड समय पर खर्च नहीं होता, तो केंद्र अगले साल के बजट में कटौती कर देता है। प्रशासन ने 2026-27 के लिए ₹ 1396.63 करोड़ ज्यादा की मांग तो कर दी है, जो बढ़ कर ₹ 8379.81 करोड़ हो जाएगी, लेकिन खर्च करने की नीयत गायब है। अगर बजट में कटौती हुई, तो इसका जिम्मेदार सीधे तौर पर चंडीगढ़ प्रशासन होगा। अफ़सरशाही की सुस्ती और फाइलों को लटकाने की नीति ने शहर के विकास को वेंटिलेटर पर ला खड़ा किया है।

प्रमुख विभागों की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल: प्रेस नोट के माध्यम से उन्होंने विशेष रूप से तीन क्षेत्रों को निशाने पर लिया:

नगर निगम (MC): वार्डों के बुनियादी ढांचे और जन सुविधाओं के बजट का इस्तेमाल न होना चिंताजनक है।

स्मार्ट सिटी व इंजीनियरिंग: सड़कों की बदहाली और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स का सुस्त रफ्तार से चलना अफ़सरशाही की विफलता है।

स्वास्थ्य और शिक्षा: अस्पतालों और स्कूलों के सुधार के लिए आवंटित राशि का उपयोग न होना जनता के स्वास्थ्य और बच्चों के भविष्य से समझौता है।

जनता का दर्द: टैक्स हमारा, सुविधा अफसरों की मर्जी पर क्यों? राजबीर सिंह भारतीय ने कड़े शब्दों में कहा, “अधिकारी फाइलों को इधर-उधर घुमाने और निर्णय टालने में व्यस्त हैं, जबकि जनता टूटी सड़कों और बदहाल सार्वजनिक सेवाओं से जूझ रही है। टेंडर प्रक्रिया में देरी और आपसी खींचतान ने शहर के विकास को ठप कर दिया है।”

प्रशासन से आर-पार की मांग:

उन विभागों और अफ़सरों की सूची सार्वजनिक की जाए जिन्होंने बजट खर्च नहीं किया।

बजट लैप्स होने की स्थिति में दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय हो और उन पर सख्त कार्रवाई की जाए।

विकास कार्यों की निगरानी के लिए एक ‘हाई-पावर कमेटी’ बने जो फाइलों के निपटारे की समय सीमा तय करे।

भवदीय,

राजबीर सिंह भारतीय समाजसेवी एवं रिटायर्ड सुपरिंटेंडेंट, एडवोकेट जनरल कार्यालय, हरियाणा। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट, चंडीगढ़।

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