#bnnindianews चंडीगढ़ : पंजाब के राज्यपाल व यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि चंडीगढ़ के मेयर का एक साल का कार्यकाल शहर के विकास के लिए पर्याप्त नहीं है। अधिकतर समय टेंडर प्रक्रिया में निकल जाता है, जिससे विकास कार्य पूरे नहीं हो पाते। इसलिए मेयर के कार्यकाल को बढ़ाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इस संबंध में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मॉडल का अध्ययन कर प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा।
मेयर चुनाव में पारदर्शिता को लेकर उन्होंने कहा कि “रेज योर हैंड” सिस्टम लागू किया गया है। मनोनीत पार्षदों को वोटिंग अधिकार देने के पक्ष में प्रशासन नहीं है और इस पर सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखा जाएगा।
चंडीगढ़ मेट्रो प्रोजेक्ट पर फिलहाल संशय जताते हुए उन्होंने कहा कि इसकी वायबिलिटी पर अध्ययन चल रहा है। विकल्प के तौर पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत किया जा रहा है। शहर को 100 नई बसें मिलेंगी।
वायलेशंस पर उन्होंने बताया कि नोटिसों की संख्या घटाई गई है ताकि उद्योगों का पलायन न हो और शहर का मूल स्वरूप बना रहे। मनीमाजरा में 24×7 पानी योजना को अव्यावहारिक बताया गया।
वेंडरों को लाइसेंस देकर तय स्थानों पर भेजा जा रहा है। आवारा कुत्तों और अपराध नियंत्रण के लिए सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार कदम उठाए जाएंगे।
आउटसोर्स व कांट्रेक्ट कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षा पर हरियाणा और पंजाब के मॉडल का अध्ययन किया जाएगा।
अपने जीवन पर बात करते हुए कटारिया ने कहा कि उन्होंने 400 रुपये की नौकरी से करियर शुरू किया, कई संघर्ष झेले, लेकिन ईमानदारी और जनता से जुड़ाव के साथ राजनीति की। नशे के खिलाफ अभियान को उन्होंने बड़ी सामाजिक चुनौती बताया और जनता के सहयोग से इसे खत्म करने की अपील की।
