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“दिव्य श्रीमद्भागवत कृष्ण कथा” – स्वामी रसिक जी महाराज

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समाचार सारांश: भारतीय संस्कृति पूरी दुनिया के कल्याण के लिए है

चंडीगढ़ के पूर्व सांसद और भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल, सत्य पाल जैन ने हाल ही में भारतीय विरासत और संस्कृति की महत्ता पर अपने विचार साझा किए। पलसोड़ा में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत पूरी दुनिया में बेजोड़ है।     उनके संबोधन की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • विश्व कल्याण की भावना: जैन ने कहा कि भारतीय संस्कृति किसी एक धर्म, जाति या क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह पूरी दुनिया के कल्याण की प्रार्थना करती है।

  • संतों का योगदान: उन्होंने बताया कि भारत के साधु-संतों, ऋषियों और महर्षियों ने हमारी संस्कृति को सहेजने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। वे पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस ज्ञान को आगे बढ़ाते हैं।

  • देश की सुरक्षा: उनका मानना है कि जब तक देश की संस्कृति और हमारे आध्यात्मिक मूल्य जीवित हैं, तब तक भारत के अस्तित्व पर कोई खतरा नहीं आ सकता।कार्यक्रम की खास बातें

यह भाषण “दिव्य श्रीमद्भागवत कृष्ण कथा” के दौरान दिया गया, जहाँ सत्य पाल जैन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। कार्यक्रम में उन्होंने स्वामी रसिक जी महाराज का आशीर्वाद लिया और स्वामी जी ने उन्हें शॉल भेंट कर सम्मानित किया।

“जब तक देश की संस्कृति, साधु-संत और हमारी विरासत जीवित है, तब तक इस महान राष्ट्र के अस्तित्व को कोई खतरा नहीं हो सकता।” — सत्य पाल जैन

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