श्री दिगम्बर जैन मंदिर, सेक्टर 27-बी, चंडीगढ़ में अक्षय तृतीया पर्व श्रद्धा व उत्साह के साथ मनाया गया

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चंडीगढ़, दिनांक: 19 अप्रैल 2026
पावन पर्व अक्षय तृतीया श्री दिगम्बर जैन मंदिर, सेक्टर 27-बी, चंडीगढ़ में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 6:00 बजे भगवान के अभिषेक एवं शांतिधारा से हुआ। शांतिधारा के उपरांत मधुर एवं भावपूर्ण अक्षय तृतीया कथा का आयोजन किया गया। इसके पश्चात विभूति जैन ने मंगलाचरण के साथ नृत्य किया, आशी जैन ने नृत्य प्रस्तुत किया जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

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इस अवसर पर एस.एस. जैन सभा के सदस्य भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि – DGP ह्यूमन राइट्स हरियाणा श्री संजीव जैन, धर्म बहादुर जैन अध्यक्ष श्री दिगम्बर जैन सोसाइटी एवं एस.एस. जैन सभा के अध्यक्ष श्री विजय जैन ने मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज को श्रीफल भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
अपने प्रवचन में मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज ने अक्षय तृतीया के महत्व को वर्तमान जीवन में समझाते हुए कहा कि यह पर्व हमें संयम, दान और धर्म की ओर प्रेरित करता है।उन्होंने बताया “अक्षय” का अर्थ है जो कभी क्षय न हो, अर्थात इस दिन किया गया पुण्य, दान एवं साधना अक्षय फल प्रदान करता है।

यह दिन दान, तप एवं संयम के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।जैन परंपरा के अनुसार, इसी दिन भगवान ऋषभदेव ने वर्ष भर के उपवास के पश्चात प्रथम आहार ग्रहण किया था, जिससे आहार दान की परंपरा प्रारंभ हुई।यह पर्व हमें अहिंसा, सेवा और करुणा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।इस दिन शुभ कार्यों का प्रारंभ विशेष फलदायी माना जाता है।
इस पावन अवसर पर 51 जोड़ों ने मुनि श्री को आहार अर्पित करने का सौभाग्य प्राप्त किया।
श्री धर्मबहादुर जैन ने उपस्थित लोगों को धन्यवाद किया और बताया की भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम होते रहेंगे।
जैन मिलन चंडीगढ़ द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। जैन मिलन चंडीगढ़ के अध्यक्ष श्री रमेश जैन ने बताया कि यह उनका 33वां भंडारा था।
इसके अतिरिक्त, अहिंसा सेवा समिति द्वारा गन्ने के रस का लंगर लगाया गया। अहिंसा सेवा समिति द्वारा यह आयोजन ट्राइसिटी में 17 विभिन स्थानों पर किया गया।
कार्यक्रम का समापन भक्ति, एकता एवं आध्यात्मिक ऊर्जा के वातावरण में हुआ, जिसने अक्षय तृतीया के वास्तविक संदेश को साकार किया।

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