ब्रैस्ट कैंसर नए युग की सबसे आम और घातक घातक बीमारी: डॉ. हरिंदरपाल सिंह

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मोहाली : पार्क अस्पताल, मोहाली की एक टीम; डायरेक्टर-मेडिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. संदीप कुक्कड़ व डॉ. हरिंदरपाल सिंह, सीनियर कंसलटेंट -सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. विजय जागड़, कंसल्टेंट-रेडिएशन ऑन्कोलॉजी डॉ. जोबनजीत कौर व डॉ. अरनव तिवारी ने भारत में ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते रुझानों पर शुक्रवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया।

डायरेक्टर-मेडिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. संदीप कुक्कड़ ने कहा, “भारत में, 15.6 लाख नए मामलों के साथ 30 लाख लोग कैंसर से पीड़ित हैं और कैंसर हर साल 8.7 लाख लोगों की जान लेता है। ब्रैस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में सबसे आम कैंसर हैं और भारतीय पुरुषों में लंग और लिवर के आम कैंसर हैं। कुछ दशक पहले, ब्रैस्ट कैंसर पचास वर्ष की आयु के बाद ही देखा जाता था, और पीड़ित युवा महिलाओं की संख्या कम थी, जिसमें 50 वर्ष से अधिक आयु की लगभग 65% से 70% और 50 वर्ष से कम आयु की केवल 30% -35% महिलाएं थीं। विडंबना यह है कि ब्रैस्ट कैंसर कम आयु वर्ग में अधिक आम है और 70% से अधिक मामले एडवांस्ड स्टेज में होते हैं और जो उच्च मृत्यु दर के लिए जिम्मेदार होते हैं।

डायरेक्टर-मेडिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. हरिंदरपाल सिंह ने कहा कि जीवनशैली में बदलाव से एक तिहाई कैंसर को रोका जा सकता है।
उन्होंने बताया कि ब्रैस्ट सेल्फ चेक और मैमोग्राफी प्रारंभिक अवस्था में ब्रैस्ट कैंसर के मामलों को कम करने की एक अच्छी तकनीक है और छाती के एक्स-रे जैसी सरल जांच से कैंसर को शुरुआती चरणों में पकड़ने में मदद कर सकती है।
पार्क अस्पताल 19 अस्पतालों, 3500 बिस्तरों, 800 आईसीयू बेड, 14 कैथ लैब, 45 मॉड्यूलर ओटी और 1000 से अधिक डॉक्टरों के साथ उत्तर भारत का सबसे बड़ा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल नेटवर्क है।

सीनियर कंसलटेंट -सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. विजय जागड़ के अनुसार, ब्रैस्ट कैंसर अब सर्वाइकल कैंसर को पीछे छोड़ नए युग की सबसे आम और घातक जानलेवा बीमारी बन गया है। ब्रैस्ट कैंसर हर साल 2.1 मिलियन महिलाओं को प्रभावित करता है और भारत में हर साल 2.20 लाख नए मामले सामने आते हैं।
कंसल्टेंट-रेडिएशन ऑन्कोलॉजी डॉ. जोबनजीत कौर ने कहा कि 2020 की तुलना में 2026 तक कैंसर के नए मामलों की संख्या लगभग 12 प्रतिशत से 18 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद है।
कंसल्टेंट-रेडिएशन ऑन्कोलॉजी डॉ. अरनव तिवारी ने कहा कि हर साल 1.75 लाख नए मामले सामने आने के साथ भारत में ओरल कैंसर का सबसे अधिक प्रसार दर्ज किया जा रहा है। ओरल कैंसर के 90 प्रतिशत मामलों में तंबाकू और गुटखा का योगदान होता है।

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